वेनेजुएला की सुरक्षा के लिए आगे आए पुतिन, अटलांटिक महासागर में तैनात की पनडुब्बी...क्या होकर रहेगा थर्ड वर्ल्ड वॉर ?

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद वैश्विक तनाव तेज हो गया है. रूस ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए वेनेजुएला के पास अपनी पनडुब्बी तैनात कर दी है. साथ ही एक संदिग्ध रूसी तेल टैंकर को अमेरिकी जब्ती से बचाने की कोशिशें भी सामने आई हैं.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : 3 जनवरी की सुबह अमेरिका द्वारा किए गए एक विशेष ऑपरेशन ने वैश्विक राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया. इस ऑपरेशन के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी नियंत्रण में ले लिए जाने की खबर सामने आई, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और कई देशों ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी आलोचना की.

रूस और अन्य देशों की तीखी प्रतिक्रिया

अमेरिकी कार्रवाई के बाद रूस, उत्तरी कोरिया सहित कई देशों ने खुलकर नाराज़गी जताई. मॉस्को ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए अमेरिका की मंशा पर सवाल उठाए. इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच रूस ने यह संकेत दिया कि वह अपने पुराने सहयोगी वेनेजुएला को अकेला नहीं छोड़ेगा और हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है.

वेनेजुएला के पास रूसी पनडुब्बी की तैनाती
तनाव को और बढ़ाते हुए रूस ने वेनेजुएला के नजदीकी समुद्री क्षेत्र में अपनी एक पनडुब्बी तैनात कर दी है. बताया जा रहा है कि यह कदम संभावित अमेरिकी जब्ती से जुड़े खतरों को देखते हुए उठाया गया है. क्षेत्र में रूसी नौसैनिक मौजूदगी से हालात और संवेदनशील हो गए हैं और विशेषज्ञ इसे अमेरिका-रूस टकराव की नई कड़ी के रूप में देख रहे हैं.

दशकों पुराना रूस-वेनेजुएला संबंध
रूस और वेनेजुएला के रिश्ते नए नहीं हैं. बीते कई दशकों से मॉस्को, कराकस का रणनीतिक सहयोगी रहा है. ऊर्जा, रक्षा और कूटनीति के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहरे संबंध रहे हैं. ऐसे में मौजूदा संकट के दौरान रूस का खुलकर वेनेजुएला के समर्थन में उतरना इस पुराने गठबंधन की ही अगली कड़ी माना जा रहा है.

संदिग्ध रूसी टैंकर पर अमेरिकी नजर
एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि रूस ने अपने एक संदिग्ध तेल टैंकर को सुरक्षा देने के लिए उत्तरी अटलांटिक में अतिरिक्त नौसैनिक संसाधन तैनात किए हैं. यह टैंकर, जो अब “मरीनरा” नाम से जाना जा रहा है, लंबे समय से अमेरिकी कोस्ट गार्ड की निगरानी में है. हालांकि जहाज खाली बताया जा रहा है, फिर भी उसकी गतिविधियों ने अमेरिकी एजेंसियों का ध्यान खींचा है.

पहले ‘बेला 1’ था टैंकर का नाम
जानकारी के मुताबिक, इस टैंकर को पहले ‘बेला 1’ के नाम से जाना जाता था. यह जहाज दो हफ्तों से अधिक समय तक वेनेजुएला के आसपास प्रतिबंधित तेल शिपमेंट वाले इलाकों में सक्रिय रहा. अमेरिकी नेतृत्व वाली समुद्री नाकेबंदी से बचने की कोशिशों के बीच यह टैंकर न तो सही तरीके से डॉक कर सका और न ही कच्चा तेल लोड कर पाया. इसके बावजूद अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसका पीछा जारी रखा.

ब्लैक मार्केट एनर्जी नेटवर्क पर अमेरिकी सख्ती
अमेरिका की यह निगरानी व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य वैश्विक ब्लैक मार्केट एनर्जी सप्लाई को रोकना है. इसमें उन जहाजों पर खास नजर रखी जा रही है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल की ढुलाई में शामिल बताए जाते हैं. इसी रणनीति के तहत खाली होने के बावजूद इस टैंकर को संदिग्ध माना गया.

खुले समुद्र में नाम और पहचान बदली
दिसंबर 2025 में इस जहाज से जुड़ा एक और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया. खुले समुद्र में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा जहाज पर चढ़ने की कोशिश को चालक दल ने विफल कर दिया. इसके बाद जहाज के बाहरी हिस्से पर बड़ा रूसी झंडा बना दिया गया, इसका नाम बदलकर “मरीनरा” कर दिया गया और इसका रजिस्ट्रेशन रूस में करवा लिया गया.

कानूनी पेच और मॉस्को की चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, बिना किसी निरीक्षण और औपचारिक प्रक्रिया के जहाज को रूसी झंडे के तहत पंजीकृत करने की अनुमति देना असामान्य है. इससे किसी भी संभावित अमेरिकी जब्ती से जुड़े कानूनी हालात और जटिल हो गए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम हाल के दिनों में रूसी तेल से जुड़े जहाजों पर हुई अमेरिकी कार्रवाइयों को लेकर मॉस्को की बढ़ती चिंता को दर्शाता है.

बढ़ता टकराव और अनिश्चित भविष्य
वेनेजुएला संकट, रूसी पनडुब्बी की तैनाती और संदिग्ध टैंकर की सुरक्षा ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री राजनीति को और तनावपूर्ण बना दिया है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह टकराव कूटनीतिक बातचीत की ओर बढ़ता है या वैश्विक शक्ति संतुलन में और अस्थिरता लाता है. फिलहाल, दुनिया की निगाहें अमेरिका और रूस की अगली चाल पर टिकी हुई हैं.

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