S. Jaishankar: बुधवार को एस जयशंकर ने रूसी कंपनियों से भारतीय साझेदारों के साथ अधिक गहनता से जुड़ने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से हो रहा आधुनिकीकरण और उपभोग की बदलती आदतें विदेशी व्यवसायों के लिए नए अवसर लेकर आई हैं. एस जयशंकर ने ये भी स्पष्ट किया कि मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने विदेशी कंपनियों के लिए भारत के द्वार खोल दिए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि देश का बढ़ता बुनियादी ढांचा और बदलती जीवनशैली रूसी उद्यमों को भारतीय बाजार में बड़े अवसर प्रदान करती है.
एस जयशंकर ने कहा कि मेक इन इंडिया और ऐसी अन्य पहलों ने विदेशी व्यवसायों के लिए नए द्वार खोले हैं. भारत का आधुनिकीकरण और शहरीकरण, उपभोग और जीवनशैली में बदलाव के कारण अपनी मांगें पैदा करता है. इनमें से प्रत्येक आयाम रूसी कंपनियों को अपने भारतीय समकक्षों के साथ और अधिक गहनता से जुड़ने का निमंत्रण देता है. हमारा प्रयास उन्हें इस चुनौती का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करना है.
विदेश मंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर 50% टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं. पहले उन्होंने 25% शुल्क की घोषणा की थी, जिसे बाद में रूस-भारत तेल व्यापार का हवाला देकर दोगुना कर दिया. आधे शुल्क पहले ही लागू हो चुके हैं, जबकि बाकी 27 अगस्त से प्रभावी होंगे.
मास्को में जयशंकर ने कहा कि हमारा व्यापार क्षेत्र सीमित है और हाल तक हमारे व्यापार की मात्रा भी सीमित थी. हाल के वर्षों में इसमें वृद्धि हुई होगी, लेकिन व्यापार घाटा भी बढ़ा है. व्यापार में विविधता और संतुलन, दोनों के लिए अब हमारी ओर से और अधिक कठोर प्रयास आवश्यक हैं. अंततः, ये प्रयास न केवल उच्च व्यापार लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए, बल्कि मौजूदा स्तरों को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक हैं.
जयशंकर ने अधिक निवेश, संयुक्त उद्यम और अन्य सहयोग की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि वह और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव एक स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि एक स्थायी रणनीतिक साझेदारी में एक मजबूत और टिकाऊ आर्थिक घटक होना चाहिए.
भारत पर अमेरिकी टैरिफ के बावजूद रूस ने तेल आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना से इनकार किया है. उप-व्यापार आयुक्त एवगेनी ग्रिवा ने कहा कि राजनीतिक स्थिति के बावजूद, हम अनुमान लगा सकते हैं कि कच्चे तेल के आयात का स्तर लगभग समान ही रहेगा. वर्तमान में भारत की ऊर्जा आपूर्ति में रूस का योगदान लगभग 40% है और चीन के बाद भारत रूसी ऊर्जा का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. First Updated : Thursday, 21 August 2025