हॉर्मुज पर महासंग्राम का काउंटडाउन शुरू, 22 देशों ने ईरान को घेरा, तेल की नस पर जंग से दुनिया थर्राई अब टकराव निर्णायक मोड़ पर
मिडिल ईस्ट में हालात अब सिर्फ तनाव नहीं रहे, यह सीधे टकराव की दहलीज पर खड़े हैं और हॉर्मुज स्ट्रेट अब दुनिया के लिए सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट बन चुका है।

हॉर्मुज स्ट्रेट पर हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। जहाजों की आवाजाही पर असर दिख रहा है। कमर्शियल शिपिंग लड़खड़ा गई है। दुनिया की नजर इसी रूट पर टिकी है। यही रास्ता तेल की सबसे बड़ी नस है। और अब यही नस जाम होने लगी है। बाजार हिल गया है, दुनिया बेचैन है। एक साथ 22 देशों ने मोर्चा खोल दिया है। यूरोप के बड़े देश आगे आए हैं। खाड़ी देश भी साथ खड़े हैं। एक कड़ा और सीधा संदेश दिया गया है। ईरान की कार्रवाई को गैरकानूनी बताया गया है। यह सिर्फ बयान नहीं, दबाव की खुली रणनीति है। तेहरान पर घेरा और कसता दिख रहा है।
क्या ईरान पर लगे आरोप आग में घी डाल रहे हैं?
ईरान पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। निहत्थे जहाजों को निशाना बनाने की बात कही गई। तेल और गैस ढांचे पर हमले बताए गए। ड्रोन और मिसाइल के इस्तेमाल के आरोप लगे। समुद्र में माइंस बिछाने की बात सामने आई।इन कदमों को खतरनाक बताया गया। और अब मामला सिर्फ आरोप नहीं, वैश्विक चिंता बन गया है।
क्या अमेरिका ने जंग का गियर बदल दिया?
अमेरिका ने हमले और तेज कर दिए हैं। हजारों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। सैकड़ों जहाज तबाह करने का दावा हुआ। अमेरिकी कमांड ने इसे बड़ी कार्रवाई बताया। ईरान की ताकत कमजोर होने की बात कही गई। यह सिर्फ बयान नहीं, जंग का संकेत है। और अब खेल और खतरनाक होता दिख रहा है।
क्या दुनिया तेल के तूफान में फंसने वाली है?
हॉर्मुज दुनिया के तेल व्यापार की रीढ़ है। यहां हलचल का असर तुरंत दिखता है। तेल की कीमतें उछलने लगी हैं। कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है। आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ग्लोबल सप्लाई चेन हिल चुकी है। अगर यही हाल रहा तो असर हर घर तक पहुंचेगा।
क्या संकट को थामने की कोशिश शुरू हुई?
22 देशों ने रास्ता खोलने की मांग की है। सुरक्षित नौवहन की बात कही गई है। यूएन नियमों का हवाला दिया गया। फ्री नेविगेशन की अपील की गई। ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की कोशिश है। लेकिन अभी कोई ठोस प्लान सामने नहीं है। हालात पर सिर्फ नजर रखी जा रही है।
क्या टकराव अब युद्ध में बदलने वाला है?
विशेषज्ञ इसे बेहद संवेदनशील मोड़ मान रहे हैं। एक गलती बड़ा विस्फोट बन सकती है। ईरान झुकने को तैयार नहीं दिखता। पश्चिमी देश दबाव बढ़ा रहे हैं। दुनिया दो हिस्सों में बंटती नजर आ रही है। तनाव अब खामोश नहीं, खुला हो चुका है। आने वाले दिन तय करेंगे कि जंग होगी या राहत।


