बातचीत या जंग की तैयारी? ईरान की ओर बढ़ रहे अमेरिकी युद्धपोत, ट्रंप बोले- टकराव नहीं चाहते
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बातचीत की इच्छा जताई, लेकिन साथ ही सैन्य तैयारी का संकेत भी दिया. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती बढ़ी है, जबकि ईरान ने अपनी सेना को 1000 आधुनिक ड्रोन सौंपे हैं.

वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के साथ बातचीत का रास्ता अपनाने के इच्छुक हैं, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.
गुरुवार को कैनेडी सेंटर में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस समय अमेरिका के बेहद शक्तिशाली युद्धपोत ईरान की दिशा में बढ़ रहे हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर हालात ऐसे बनें कि इन जहाजों का इस्तेमाल न करना पड़े, तो यह सबसे अच्छा होगा. ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका टकराव से बचना चाहता है, लेकिन दबाव बनाए रखना भी उसकी रणनीति का हिस्सा है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ी अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी नौसेना ने मिडिल ईस्ट में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर ली है. एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, हाल ही में एक नया नौसैनिक विध्वंसक जहाज इस क्षेत्र में पहुंचा है. पिछले 48 घंटों के भीतर यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक नाम का यह युद्धपोत मिडिल ईस्ट में तैनात किया गया.
इस नई तैनाती के बाद अब मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कुल छह विध्वंसक जहाज मौजूद हैं. इनके अलावा एक विमानवाहक पोत और तीन अन्य तटीय युद्धपोत भी पहले से इस क्षेत्र में तैनात हैं. यह साफ संकेत है कि अमेरिका किसी भी संभावित हालात के लिए सतर्क है.
ईरान की तैयारी: सेना को मिले 1000 नए ड्रोन
दूसरी ओर, ईरान भी किसी संभावित सैन्य टकराव को लेकर अपनी तैयारी तेज कर रहा है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को हाल ही में एक हजार नए ड्रोन सौंपे गए हैं. तेहरान के सूत्रों के अनुसार, ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका की शर्तों पर समझौता करना देश के लिए युद्ध से भी ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है.
आधुनिक तकनीक से लैस ड्रोन
ईरानी सेना को मिले ये ड्रोन मौजूदा और भविष्य के खतरों को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गए हैं. इन्हें जून महीने में अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों से मिले अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है. रक्षा मंत्रालय के सहयोग से सेना के विशेषज्ञों ने इन ड्रोन को डिजाइन किया है.
इनमें कई तरह के ड्रोन शामिल हैं, जैसे हमला करने वाले, लड़ाकू, निगरानी करने वाले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन. इन्हें इस तरह बनाया गया है कि ये जमीन, समुद्र और हवा में मौजूद स्थिर और चलते हुए लक्ष्यों पर प्रभावी कार्रवाई कर सकें.


