बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया अकाउंट पर सख्ती, बिना मंजूरी नहीं चला सकेंगे

बिहार कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त लगाम कस दी है. आचरण नियमों में संशोधन कर बार-बार हो रहे दुरुपयोग को रोकने का बड़ा फैसला लिया गया. अब कर्मचारी अपने मन से पोस्ट नहीं कर पाएंगे और नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया है. बिहार कैबिनेट ने बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली में संशोधन को मंजूरी देते हुए नए और कड़े प्रावधान लागू करने का फैसला लिया है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी कर्मचारियों के आचरण को नियंत्रित किया जा सके.

बिहार पब्लिक सर्वेंट कंडक्ट नियम 2026 के तहत अब राज्य के किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से पहले सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी अनिवार्य होगी. सरकार का मानना है कि हाल के वर्षों में सोशल मीडिया के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं, जिन्हें देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया था.

सोशल मीडिया अकाउंट के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य

संशोधित नियमों के अनुसार, कोई भी सरकारी सेवक बिना अनुमति सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकेगा. सरकारी कर्मचारी अब अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन के लिए आधिकारिक ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर का उपयोग भी नहीं कर सकेंगे.

सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर सरकार सख्त

इस फैसले पर जानकारी देते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र ने कहा कि सरकार ने यह संशोधन सोशल मीडिया के बार-बार हो रहे दुरुपयोग को ध्यान में रखते हुए किया है. उन्होंने कहा ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जिनमें फेसबुक, X, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम आदि जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग सरकारी कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है. सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इस संबंध में विस्तृत नियम अधिसूचित किए गए हैं.
आपत्तिजनक पोस्ट और सरकारी गरिमा पर असर डालने पर रोक

नए नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा, ऐसे किसी भी उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है जो उनके पद की गरिमा को ठेस पहुंचाए या सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाए.

नीतियों और अदालतों के आदेशों पर निजी राय नहीं

संशोधित आचरण नियमों के अनुसार, सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर सरकारी नीतियों, योजनाओं या सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों पर अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त नहीं कर सकेंगे.

व्यक्तियों और संस्थाओं के समर्थन या आलोचना पर पाबंदी

नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारी किसी विशेष व्यक्ति, कानूनी पेशेवर, मीडिया संस्थान या राजनीतिक संस्था के समर्थन या विरोध में सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकेंगे. इसके साथ ही गोपनीय सूचनाओं को साझा करने पर रोक और सरकारी उपलब्धियों को निजी उपलब्धि के रूप में पेश करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.

 वीडियो, रील और लाइवस्ट्रीमिंग 

संशोधन के तहत कार्यस्थल से जुड़े किसी भी प्रकार के वीडियो या रील बनाने पर पूरी तरह रोक रहेगी. साथ ही किसी भी आधिकारिक बातचीत या संवाद को सोशल मीडिया पर लाइवस्ट्रीम करना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है.

डिजिटल अनुशासन सुनिश्चित करने का प्रयास

बी. राजेंद्र ने कहा कि इन नए नियमों का उद्देश्य डिजिटल स्पेस में सरकारी सेवकों के बीच अनुशासन और जिम्मेदार आचरण सुनिश्चित करना है, ताकि वे अपने आधिकारिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के अनुरूप व्यवहार करें.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag