मर्जर की डेट तय थी, अचानक अजित पवार के निधन ने सब बदल दिया

एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय अंतिम चरण में था, लेकिन अजित पवार के असामयिक निधन से प्रक्रिया में बदलाव आया. अजित पवार की अनुपस्थिति के बावजूद विलय की कोशिशें जारी हैं, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित बड़ा बदलाव हो सकता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

भविष्य की राजनीति किस मोड़ पर जाकर ठहरेगी, इसका अंदाज़ा लगाना आसान नहीं होता. महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ ऐसा ही घटनाक्रम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संदर्भ में देखने को मिला है. शरद पवार से अलग राह चुनने वाले अजित पवार ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर एक स्पष्ट खाका तैयार किया था. एनसीपी के दोनों धड़ों शरद पवार गुट और अजित पवार गुट के पुनर्मिलन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. 

अजित के निधन के बाद शोक में डूबा पवार परिवार 

दोनों पक्षों के बीच जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी थीं और एक साझा मंच से विलय की घोषणा की तारीख भी तय मानी जा रही थी. योजना के मुताबिक, एक भव्य कार्यक्रम में दोनों गुटों के एक होने का ऐलान किया जाना था. लेकिन इसी बीच एक अप्रत्याशित हादसे ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया. नगर निकाय चुनाव के प्रचार के सिलसिले में अजित पवार चार्टर प्लेन से बारामती जा रहे थे, तभी उनके विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर आई. कुछ ही समय बाद यह दुखद सूचना सामने आई कि अजित पवार का निधन हो गया है. इस घटना से न केवल महाराष्ट्र की राजनीति को गहरा झटका लगा, बल्कि पवार परिवार भी शोक में डूब गया.

सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी के विलय की प्रक्रिया पूरी तरह रुकी नहीं है, लेकिन अब इसकी समयसीमा आगे बढ़ सकती है. अजित पवार इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे थे और दोनों गुटों के बीच संवाद की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते थे. उनके असामयिक निधन से राजनीतिक संतुलन जरूर प्रभावित हुआ है.

बताया जा रहा है कि जिला परिषद चुनावों के बाद मर्जर की औपचारिक घोषणा की योजना थी. अजित पवार के निधन के बाद बारामती पहुंचे वरिष्ठ नेताओं ने आपात बैठक कर बदले हालात में आगे की रणनीति पर चर्चा की. नेताओं का मानना है कि प्रक्रिया में देरी हो सकती है, लेकिन बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है.

राजनीतिक विश्लेषकों का क्या कहना है? 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों गुट एक होते हैं, तो इससे शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के सरकार में शामिल होने की संभावनाएं भी बन सकती है. फिलहाल अजित पवार गुट महायुति सरकार में है, जबकि एनसीपी (एसपी) महाविकास आघाड़ी का हिस्सा है. ऐसे में एनसीपी का संभावित विलय महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.

पार्टी नेताओं के अनुसार, हाल के नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों का साथ आना इसी दिशा में बढ़ते कदम थे. अब देखना होगा कि बदली परिस्थितियों में यह राजनीतिक प्रक्रिया किस रफ्तार से आगे बढ़ती है.

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