Budget 2026: 1 फरवरी के बाद स्मार्टफोन महंगे होंगे या सस्ते? जानें एक्सपर्ट्स की राय

बजट 2026 के बाद स्मार्टफोन की कीमतों पर अनिश्चितता का बादल मंडरा रहा है. AI की जबरदस्त मांग ने मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत पैदा कर दी है, जिससे उत्पादन लागत आसमान छू रही है. विशेषज्ञ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देकर आयात पर निर्भरता कम करने की सलाह दे रहे हैं. अब सब कुछ सरकार के नीतिगत फैसलों पर टिका है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हैं और आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बजट के बाद स्मार्टफोन्स की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी. आज के दौर में स्मार्टफोन केवल एक लग्जरी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है, ऐसे में कीमतों में किसी भी तरह का बदलाव सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालता है.

हर साल की तरह इस बार भी बजट से राहत की उम्मीदें हैं. खासकर तब, जब बीते एक साल में भारतीय स्मार्टफोन बाजार में कई नए देसी ब्रांड्स की एंट्री हुई है, जिन्होंने चीनी कंपनियों को कड़ी चुनौती दी है. हालांकि, कुछ बड़े ब्रांड्स द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने के बाद यह चिंता और गहरी हो गई है कि कहीं बजट 2026 के बाद स्मार्टफोन्स और महंगे न हो जाएं.

स्मार्टफोन मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

पिछले साल भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में कई भारतीय कंपनियां उतरी हैं, जिससे मुकाबला और तेज हो गया है. जहां चीनी कंपनियों ने फिलहाल अपनी कीमतों को स्थिर बनाए रखा है, वहीं सैमसंग ने साल के आखिर में अपने कुछ मॉडल्स की कीमतों में इजाफा किया. इसी वजह से उपभोक्ताओं और इंडस्ट्री दोनों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की क्या है राय?

मीडिया के मुताबिक, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती वैश्विक मांग के चलते मेमोरी चिप्स जैसे अहम कंपोनेंट्स की कमी हो गई है. इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है और स्मार्टफोन कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट में इजाफा हुआ है. ऐसे में कंपनियों के लिए बिना कीमत बढ़ाए लागत को संभालना मुश्किल होता जा रहा है.

कंपनियां क्यों नहीं चाहतीं कीमतें बढ़ाना

हालांकि, स्मार्टफोन कंपनियां कीमतों को जरूरत से ज्यादा बढ़ाने से भी बच रही हैं. इसकी वजह यह है कि महंगे फोन बाजार के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं और डिमांड पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं. रियलमी के पूर्व CEO और Nxtquantum Shift Technologies के फाउंडर माधव सेठ ने कहा कि भारत का टेक्नोलॉजी सेक्टर एक अहम मोड़ पर है.
उन्होंने आगे कहा कि AI इंटीग्रेटेड डिवाइस की बढ़ती डिमांड के कारण फोन की कीमतें बढ़ गई हैं.

किन क्षेत्रों पर देना होगा जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को स्मार्टफोन वैल्यू चेन में आगे बढ़ने की जरूरत है. इसके लिए कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड और अन्य जरूरी कंपोनेंट्स का देश में निर्माण अहम होगा. इसके साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सिस्टम डिजाइन और सॉफ्टवेयर आधारित इनोवेशन पर भी फोकस बढ़ाना जरूरी है.

बजट से क्या मिल सकती है राहत?

फिलहाल, भारत में ज्यादातर स्मार्टफोन असेंबल किए जाते हैं, जबकि अहम पार्ट्स का आयात किया जाता है. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर बजट 2026 में टारगेटेड टैक्स इंसेंटिव और पॉलिसी सपोर्ट दिया जाता है, तो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सकता है. इससे लागत पर काबू पाया जा सकेगा, कीमतें स्थिर रह सकती हैं और कुछ मामलों में स्मार्टफोन सस्ते भी हो सकते हैं.

आगे क्या?

ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव के चलते फिलहाल बड़ी कीमत कटौती की संभावना कम है, लेकिन बजट 2026 में तय की जाने वाली नीतियां यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी कि आने वाले वर्षों में स्मार्टफोन उपभोक्ताओं के लिए महंगे होंगे या किफायती.

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