दुनियाभर के इस्लामिक देशों के नेता दिल्ली में जुटेंगे, मोदी सरकार देगी साझेदारी को नई दिशा

भारत 31 जनवरी को दिल्ली में दुनियाभर के इस्लामिक देशों के नेताओं की बड़ी बैठक की मेजबानी करने जा रहा है. यह ऐतिहासिक सम्मेलन 10 साल बाद हो रहा है और इसका उद्देश्य भारत-अरब देशों के बीच कूटनीतिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करना है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: भारत इस महीने शनिवार (31 जनवरी) को अपनी राजधानी दिल्ली में दुनियाभर के इस्लामिक देशों के नेताओं की एक बड़ी बैठक की मेजबानी करने जा रहा है. यह बैठक करीब 10 साल बाद आयोजित की जा रही है और इसका उद्देश्य भारत और अरब देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और नई साझेदारी को बढ़ावा देना है.

इस ऐतिहासिक आयोजन की अध्यक्षता भारत और UAE दोनों करेंगे. बैठक में 22 अरब देशों के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे, जबकि अरब लीग के महासचिव भी इसमें मौजूद रहेंगे. यह बैठक न केवल कूटनीतिक बल्कि व्यापार, ऊर्जा और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

10 साल बाद दिल्ली में होगी बैठक

दिल्ली में होने वाली इस बैठक की मेजबानी भारत कर रहा है और इसे भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा. विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, बैठक से पहले वरिष्ठ अधिकारियों की एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई है. पिछली बार यह बैठक 2016 में बहरीन में आयोजित हुई थी. भारत लीग ऑफ अरब स्टेट्स (LAS) का पर्यवेक्षक (Observer) देश है और इस संगठन में कुल 22 सदस्य देश शामिल हैं.

लीग ऑफ अरब स्टेट्स

लीग ऑफ अरब स्टेट्स (LAS) का गठन 22 मार्च 1945 को काहिरा में किया गया था. शुरू में सात देश-मिस्र, इराक, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब और सीरिया सदस्य थे. अब इस संगठन में कुल 22 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के देश आते हैं. इसके अलावा, भारत, ब्राजील, आर्मेनिया जैसे कई देश ऑब्जर्वर के तौर पर जुड़े हुए हैं.

भारत और अरब देशों के बीच साझेदारी का महत्व

भारत और अरब देशों के रिश्ते सदियों पुराने हैं. व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा, तकनीक, मीडिया और संस्कृति के क्षेत्र में दोनों पक्षों का सहयोग बेहद मजबूत है. भारत और अरब देशों के बीच व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक का है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल, गैस और LPG अरब देशों से ही प्राप्त करता है. वहीं, करीब 90 लाख भारतीय अरब देशों में रोजगार पा रहे हैं.

इस बैठक में व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. भारत इस आयोजन के माध्यम से अरब देशों के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देना चाहता है.

भारत की मध्यस्थता की भूमिका

फिलिस्तीन की विदेश मंत्री वर्सेन अघाबेकियन शाहिन ने बैठक से पहले भारत से अपील की है कि गाजा के पुनर्निर्माण में मदद बढ़ाई जाए और फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए UNRWA को समर्थन जारी रखा जाए. उन्होंने कहा, "भारत हमेशा फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा है और दो-राज्य समाधान, फिलिस्तीनियों के अधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता रहा है. भारत आज इजराइल और फिलिस्तीन दोनों का दोस्त है और शांति के लिए मध्यस्थ की अहम भूमिका निभा सकता है."

भारत ने वेस्ट बैंक में कई स्कूलों का समर्थन किया है और गाजा में कुछ स्कूल हालिया संघर्ष में नष्ट हो गए हैं. बैठक में क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और गाजा के लिए शांति योजना पर भी चर्चा की जाएगी.

संगठन की संरचना और निर्णय प्रक्रिया

लीग ऑफ अरब स्टेट्स की परिषद में सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री शामिल होते हैं. प्रमुख राजनीतिक निर्णय साल में दो बार लिए जाते हैं. प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता है और निर्णय केवल उन देशों पर लागू होता है जो पक्ष में वोट करते हैं. संगठन बहुमत के आधार पर फैसले लेता है, लेकिन इनका पालन कराने का कोई सख्त तंत्र नहीं है. LAS, AU, EU, ASEAN और यूनियन ऑफ साउथ अमेरिकन नेशंस के साथ भी बहुपक्षीय संबंध बनाए रखता है.

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