सिम-बॉक्स से साइबर ठगी का जाल: बिहार के आरा का छोटा गांव कैसे बन गया अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड नेटवर्क का केंद्र?

बिहार के भोजपुर जिले का एक छोटा सा गांव अचानक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी की जांच का केंद्र बन गया है. महज 2000 की आबादी वाले इलाके से हजारों कॉल्स और सिम-बॉक्स नेटवर्क का खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए चौंकाने वाला है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

आरा: बिहार के भोजपुर जिले में स्थित आरा से करीब 35–40 किलोमीटर दूर नारायणपुर इलाका, जिसकी आबादी महज 2125 है, अचानक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है. न यहां कोई आईटी हब है, न बड़ी फैक्ट्री और न ही दूर-दूर तक किसी बड़े मोबाइल नेटवर्क सेंटर की मौजूदगी. इसके बावजूद इस छोटे से इलाके से महज तीन दिनों में 20 हजार से ज्यादा कॉल्स दर्ज की गईं, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया.

जांच आगे बढ़ी तो इन कॉल्स की कड़ियां भारत के अलग-अलग राज्यों से होती हुई कंबोडिया और थाईलैंड जैसे देशों में बैठे साइबर ठगों तक जा पहुंचीं. यहीं से कहानी भोजपुर जिले के एक और गांव भलुनी तक पहुंचती है, जहां एक कच्चे मकान के भीतर कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था.

2000 की आबादी, लेकिन 20 हजार कॉल्स!

डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट को जुलाई 2025 में नारायणपुर इलाके से असामान्य कॉल ट्रैफिक का अलर्ट मिला. 5 से 7 जुलाई के बीच करीब 20,000 कॉल्स रिकॉर्ड की गईं. कॉल्स का पैटर्न सामान्य मोबाइल नेटवर्क जैसा नहीं था, जिससे अवैध SIM-Box सेटअप की आशंका गहराने लगी. जांच में सामने आया कि कॉल्स का स्रोत अंतरराष्ट्रीय VoIP नेटवर्क से जुड़ा हुआ है.

कंबोडिया और थाईलैंड से जुड़ा नेटवर्क

तकनीकी विश्लेषण के दौरान यह साफ हुआ कि इन कॉल्स का संबंध कंबोडिया और थाईलैंड में सक्रिय साइबर ठग गिरोहों से है. आशंका है कि विदेशी ठग भारत में सस्ते कॉल दिखाने के लिए SIM-Box तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे टेलीकॉम सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा.

भलुनी गांव के घर तक पहुंची जांच

जांच आगे बढ़ी तो भोजपुर जिले के भलुनी गांव में रहने वाले मुकेश कुमार का घर एजेंसियों के निशाने पर आया. इस घर से चार SIM-Box मशीनें, 186 सिम कार्ड और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए. बरामद सिम कार्ड अलग-अलग राज्यों से फर्जी दस्तावेजों के जरिए एक्टिवेट कराए गए थे.

टेलीकॉम विभाग को करोड़ों का नुकसान

प्रारंभिक आकलन में टेलीकॉम विभाग ने करीब 50 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है. अवैध कॉल रूटिंग की वजह से सरकारी राजस्व को बड़ा झटका लगा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 जनवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केस अपने हाथ में ले लिया.

एजेंसियों के सामने बड़े सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक जमीनविहीन किसान का घर अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट का हिस्सा बन सकता है? क्या गांव के खेतों के बीच हाई-टेक SIM-Box मशीनें रखी जा सकती हैं? और अगर हां, तो इसके पीछे कौन लोग हैं? बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई, टेलीकॉम विभाग और CBI इन सभी सवालों के जवाब तलाशने में जुटी हुई हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag