पहलगाम हमले पर आतंकी का बड़ा कबूलनामा, पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
पहलगाम आतंकी हमले पर लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर के बयान ने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हमले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के फायदे से जोड़ने के दावे ने उसकी नीतियों और मंशा पर नई बहस छेड़ दी है.

कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जिसने पाकिस्तान की भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक वरिष्ठ कमांडर अबू मूसा कश्मीरी ने ऐसा बयान दिया है, जिसे पाकिस्तान के लिए एक तरह का अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति माना जा रहा है.
आतंकी कमांडर का दावा
बताया जा रहा है कि आतंकी कमांडर ने दावा किया है कि पहलगाम में किया गया हमला पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फायदेमंद साबित हुआ. उसके अनुसार, इस घटना के बाद वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की अहमियत बढ़ी और उसे नई कूटनीतिक संभावनाएं मिलीं. इस बयान ने पहले से लगे उन आरोपों को और मजबूत कर दिया है, जिनमें कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को परोक्ष या प्रत्यक्ष समर्थन देता है.
गौरतलब है कि इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिससे पूरे देश में गहरा आक्रोश और शोक का माहौल था. इस त्रासदी ने न सिर्फ कश्मीर बल्कि पूरे भारत को झकझोर दिया था. ऐसे में, आतंकी कमांडर का यह बयान और भी संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि इसमें एक हिंसक घटना को कूटनीतिक लाभ के रूप में प्रस्तुत किया गया है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कमांडर ने यह भी कहा कि इसी हमले के बाद पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने का अवसर मिला. यानी एक दर्दनाक आतंकी घटना को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में लाभ के तौर पर दिखाया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है.
यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण वार्ता जारी है. इस बातचीत को क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन आतंकी के इस दावे ने इन प्रयासों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
विशेषज्ञों का क्या मानना है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान पाकिस्तान की नीतियों और उसकी वास्तविक मंशा पर संदेह पैदा करते हैं. एक ओर जहां पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की बात करता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे बयान उसकी छवि को नुकसान पहुंचाते हैं. इस पूरे मामले ने यह बहस फिर तेज कर दी है कि क्या पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ सच में गंभीर है या वह दोहरी नीति अपना रहा है.


