मोदी सरकार का बड़ा फैसला, डीजल और हवाई ईंधन पर भारी एक्सपोर्ट ड्यूटी लागू

सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर कंपनियों को घरेलू बाजार में बिक्री के लिए प्रोत्साहित किया है. वहीं पेट्रोल पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया, जिससे उसकी सप्लाई को लेकर स्थिति सामान्य बनी हुई है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर एक अहम नीति परिवर्तन किया है, जिसका असर सीधे ऊर्जा क्षेत्र और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आदेश में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर लगने वाले निर्यात शुल्क में बड़ा इजाफा किया गया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और घरेलू स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है.

निर्यात को नियंत्रित करने की दिशा में सख्त कदम 

नई व्यवस्था के तहत डीजल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी वृद्धि की गई है. पहले जहां कंपनियों को प्रति लीटर डीजल निर्यात करने पर 21.5 रुपये का शुल्क देना पड़ता था, अब यह बढ़कर 55.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है. इसी तरह, हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले एटीएफ पर भी टैक्स बढ़ाया गया है. इसकी निर्यात ड्यूटी 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. इन बढ़ी हुई दरों से स्पष्ट है कि सरकार निर्यात को नियंत्रित करने की दिशा में सख्त कदम उठा रही है.

दरअसल, रिफाइनरी कंपनियां कच्चे तेल को प्रोसेस करने के बाद उसे घरेलू बाजार में बेचने के बजाय कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दाम मिलने पर निर्यात करना ज्यादा लाभकारी समझती हैं. इससे देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. सरकार का मानना है कि निर्यात पर अधिक शुल्क लगाने से कंपनियों के लिए विदेशों में ईंधन बेचना महंगा हो जाएगा और वे घरेलू बाजार को प्राथमिकता देंगी. इससे देश में डीजल और अन्य ईंधनों की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहेगी और संभावित कमी से बचा जा सकेगा.

पेट्रोल को लेकर राहत की खबर 

हालांकि, इस फैसले के बीच पेट्रोल को लेकर राहत की खबर भी सामने आई है. सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर किसी भी प्रकार का नया कर नहीं लगाया है. इसकी एक्सपोर्ट ड्यूटी पहले की तरह शून्य ही रखी गई है. इससे संकेत मिलता है कि पेट्रोल की घरेलू उपलब्धता फिलहाल संतोषजनक है और सरकार को इसमें किसी कमी की आशंका नहीं दिख रही है.

कुल मिलाकर, यह निर्णय देश के ऊर्जा संतुलन को बनाए रखने और घरेलू बाजार में ईंधन की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो