थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दशकों से चला आ रहा सीमा विवाद अब एक गंभीर सैन्य संघर्ष का रूप ले चुका है. यह संघर्ष तब और बढ़ गया जब थाईलैंड ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने 1,30,000 से अधिक नागरिकों को कंबोडिया सीमा के पास से सुरक्षित स्थानों पर भेजा है. थाई प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने चेतावनी दी कि यह संघर्ष यदि नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह पूर्ण युद्ध में बदल सकता है.
गुरुवार को शुरू हुई गोलीबारी शुक्रवार सुबह तक जारी रही. थाई सेना के अनुसार, विवादित सीमावर्ती इलाकों में 12 विभिन्न स्थानों पर संघर्ष फैला. यह पिछले दस वर्षों में दोनों देशों के बीच सबसे भीषण सैन्य झड़प मानी जा रही है. इस संघर्ष में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 14 नागरिक और एक आठ वर्षीय बच्चा शामिल हैं.
थाई सेना ने बताया कि कंबोडियाई बलों ने भारी हथियारों, फील्ड आर्टिलरी और बीएम-21 रॉकेट प्रणालियों का उपयोग किया. इसके जवाब में थाई सैनिकों ने भी रणनीतिक फायरिंग की. थाई सरकार ने "स्तर 4" का अलर्ट जारी कर सीमावर्ती प्रांतों से लोगों को निकालना शुरू किया और सभी बॉर्डर पोस्ट बंद कर दिए.
कंबोडिया की राष्ट्रीय सरकार ने अभी तक नागरिक हताहतों की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन ओद्दार मींचे प्रांत के एक अधिकारी के अनुसार एक नागरिक मारा गया और पाँच घायल हुए हैं, साथ ही 1,500 परिवारों को निकाला गया है.
इस विवाद ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब बुधवार को थाई सैनिक एक बारूदी सुरंग की चपेट में आ गए और पाँच घायल हो गए. थाईलैंड ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कंबोडिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिया और बैंकॉक में मौजूद कंबोडियाई राजदूत को निष्कासित कर दिया.
पूर्व नेता थाकसिन शिनावात्रा और हुन सेन के तीखे बयान इस विवाद को और भड़काते नज़र आए. थाकसिन ने सोशल मीडिया पर कंबोडिया के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही, वहीं हुन सेन ने इसे "युद्धोन्मादी" रवैया बताया और शांति की अपील की.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस संकट पर विशेष बैठक बुलाई है. अमेरिका और चीन दोनों ने चिंता व्यक्त की है और शांति की अपील की है. अमेरिका ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की मांग की है.
First Updated : Friday, 25 July 2025