ट्रंप ने टाला ईरान पर हमला, बोले- बातचीत सफल नहीं हुई तो होगा बड़ा सैन्य एक्शन

डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने ईरान पर बड़े हमले की तैयारी रोक दी है, लेकिन अमेरिकी सेना को अलर्ट पर रहने का आदेश दिया. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कोई संतोषजनक समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका कभी भी ईरान पर बड़ा सैन्य हमला कर सकता है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया है. ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों के प्रमुख नेताओं के अनुरोध और जारी गंभीर बातचीत के चलते मंगलवार को होने वाला हमला स्थगित किया गया. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका बड़े पैमाने पर सैन्य हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जारी बयान में ट्रंप ने कहा कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के शीर्ष नेताओं ने उनसे ईरान पर नियोजित हमले को रोकने की अपील की थी. ट्रंप के मुताबिक, मौजूदा बातचीत का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे.खाड़ी देशों के नेताओं ने किया अनुरोध

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनसे हमला टालने की अपील की. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ गंभीर स्तर पर बातचीत चल रही है और इससे परमाणु हथियारों को लेकर समझौता संभव हो सकता है.

समझौता नहीं हुआ तो होगा बड़ा हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई स्वीकार्य समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका बड़े पैमाने पर हमला  के लिए तैयार रहेगा. हालांकि उन्होंने प्रस्तावित हमले की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की. ट्रंप ने कहा, मैंने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैनियल केन और अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि हम कल ईरान पर निर्धारित हमला नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें यह भी निर्देश दिया है कि यदि कोई स्वीकार्य समझौता नहीं होता है, तो वे किसी भी क्षण ईरान पर पूर्ण और बड़े पैमाने पर हमला करने के लिए तैयार रहें.

पहले भी दे चुके हैं चेतावनी

ट्रंप ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से 19 मई को हमले की योजना का खुलासा नहीं किया था. हालांकि सप्ताहांत में उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था, ईरान के लिए समय तेजी से बीत रहा है, और उन्हें जल्द से जल्द कदम उठाना चाहिए, वरना उनका कुछ भी नहीं बचेगा.

बीते कई हफ्तों से ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि अप्रैल के मध्य में हुआ सीजफायर कभी भी टूट सकता है, यदि ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता. इस बीच समझौते की शर्तों और दायरे को लेकर भी लगातार बदलाव देखने को मिले हैं.

नेतन्याहू और शी जिनपिंग से भी हुई बातचीत

हाल के दिनों में ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी ईरान युद्ध को लेकर बातचीत की है. बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका लगातार कूटनीतिक और सैन्य दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है.

ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव जारी

इस बीच यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉमने सोमवार को कहा कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी सख्ती से लागू की जा रही है. सेंटकॉमने X पर पोस्ट करते हुए कहा, सेंटकॉम ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी को सख्ती से लागू करना जारी रखे हुए है. अमेरिकी सेना ने पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अब 85 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदल दिया है.

ईरान के शांति प्रस्ताव को भी ठुकराया

इससे पहले भी एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के उस शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम एशिया संकट को रोकने की बात कही गई थी. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान का प्रस्ताव अमेरिकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा और इसमें किसी बड़े समझौते की दिशा में ठोस प्रगति नहीं दिखी. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का नया प्रस्ताव रविवार रात पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इसमें पहले के प्रस्तावों की तुलना में केवल मामूली बदलाव किए गए थे.

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