'ट्रंप, इनकी आंखों में देखो...'ईरान के अखबार ने मरने वाली बच्चियों की दिखाई तस्वीर, अमेरिकी राष्ट्रपति पर साधा निशाना
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध में हजारों लोगों की जाने जा चुकी है. ईरान की एक अंग्रेजी अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर उन लड़कियों की फोटो साझा की है, जिनकी मौत इस हमले में गई.

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में नागरिकों की मौत का सिलसिला जारी है. ईरान के सरकारी समर्थक अंग्रेजी अखबार 'तेहरान टाइम्स' ने अपने फ्रंट पेज पर दक्षिणी शहर मिनाब के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें छापी है.
इन तस्वीरों के ऊपर बड़ा हैडलाइन है- "ट्रंप, इनकी आंखों में देखो". यह हमला युद्ध की शुरुआत में हुआ था, जिसमें मुख्य रूप से स्कूली बच्चियां शामिल थी.
मिनाब स्कूल पर हमला
मिनाब के शजारेह तैय्येबा गर्ल्स एलीमेंट्री स्कूल पर 28 फरवरी को हमला हुआ. इस हमले में 165 से 175 के बीच बच्चे मारे गए, ज्यादातर लड़कियां क्लास में पढ़ रही थी. ईरानी मीडिया और जांच में दावा किया गया है कि यह हमला अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से हुआ, जो केवल अमेरिका के पास उपलब्ध है.
स्कूल के पास एक नौसैनिक अड्डा था, जिसे निशाना बनाया गया था, लेकिन हमला स्कूल पर भी पड़ गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरान की तरफ से किया गया हमला बताया और कहा कि ईरान के हथियारों में सटीकता नहीं है.
ट्रंप पर अखबार का तीखा हमला
तेहरान टाइम्स ने ट्रंप के बयान का जवाब देते हुए लिखा कि वे झूठ बोल रहे हैं. अखबार ने कहा कि ट्रंप अपने हमलों की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे और डिप्लोमैसी के रास्ते को नकार रहे है.
फ्रंट पेज की तस्वीरें बच्चों के चेहरों को दिखाती हैं, ताकि दुनिया युद्ध की क्रूरता को महसूस करे. अखबार ने इसे युद्ध अपराध के रूप में पेश किया और कहा कि निर्दोष बच्चों की मौत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
ईरान में मौत का आंकड़ा 1255 तक पहुंचा
ईरान के डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर अली जाफरियन ने बताया कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 1255 लोग मारे गए हैं. इसमें 200 बच्चे और 11 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं. ज्यादातर मौतें आम नागरिकों की हुई, जो घरों या काम पर थे.
12 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. हमलों से 52 स्वास्थ्य केंद्र, 18 इमरजेंसी सेवाएं और 15 एम्बुलेंस क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए. तेल सुविधाओं पर हमलों से स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ गया है.
युद्ध का असर
यह युद्ध पिछले नौ दिनों में तेज हुआ है. ईरान के अधिकारी कहते हैं कि हमले सैन्य ठिकानों के अलावा आवासीय इलाकों, अस्पतालों और स्कूलों पर भी हो रहे है. बच्चों की मौत और घायलों की संख्या से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव है, लेकिन ईरान दावा करता है कि दवाइयां घरेलू उत्पादन से उपलब्ध हैं. अखबार की यह तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींच रही हैं और युद्ध में निर्दोषों की कीमत पर सवाल उठा रही है.


