बिना AC कोच के रवाना हो गई संपर्क क्रांति एक्सप्रेस...सपा सांसद के रिजर्वेशन से रेलवे में हड़कंप

रेलवे की घोर लापरवाही से यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस रविवार को मानिकपुर स्टेशन से एक एसी कोच के बिना ही चल पड़ी और अतर्रा तक बिना किसी कोच के पहुंच गई. उसी कोच में समाजवादी पार्टी के एक सांसद का आरक्षण था जिससे अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई. जिसके बाद अतर्रा में चार घंटे बाद डिब्बा जोड़कर ट्रेन आगे के लिए रवाना की गई.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

उत्तर प्रदेश : रेलवे की एक बड़ी लापरवाही ने यात्रियों और अधिकारियों के होश उड़ा दिए. मानिकपुर स्टेशन से चली यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस अपना अहम एसी कोच स्टेशन पर ही भूल गई. ट्रेन अतर्रा तक पहुच गई और किसी को भनक तक नहीं लगी. जैसे ही पता चला कि उसी कोच में समाजवादी पार्टी के एक सांसद का रिजर्वेशन था. रेल महकमे में अफरा-तफरी मच गई. इस चूक ने भारतीय रेलवे की सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

बिना कोच के दौड़ती रही एक्सप्रेस

दरअसल, रविवार का दिन यूपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ. मानिकपुर स्टेशन से जब यह ट्रेन आगे बढ़ी. तो रेलवे स्टाफ की एक भयानक अनदेखी के कारण ट्रेन का एक पूरा एसी कोच वहीं स्टेशन पर ही छूट गया. हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रेन के चालक और गार्ड को भी इस बात का रत्ती भर भी एहसास नहीं हुआ कि ट्रेन के डिब्बे कम हो गए हैं. ट्रेन अपनी रफ्तार से आगे बढ़ती रही और अतर्रा स्टेशन तक पहुंच गई.

सांसद के नाम ने मचाई खलबली

जब ट्रेन अतर्रा स्टेशन पहुंची. तब जाकर इस भारी गफलत का असली खुलासा हुआ. पता चला कि जो कोच पीछे मानिकपुर में ही छूट गया है. उसी विशेष कोच में समाजवादी पार्टी के एक माननीय सांसद का कंफर्म आरक्षण था. जैसे ही यह जानकारी रेलवे के आला अधिकारियों तक पहुंची. पूरे विभाग में हड़कंप मच गया. सांसद का नाम जुड़ने की वजह से मामला और भी गंभीर हो गया और अधिकारियों ने आनन-फानन में जांच शुरू की. स्टेशन मास्टर से लेकर कंट्रोल रूम तक फोन घनघनाने लगे.

विशेष इंजन से मंगाया गया डिब्बा

अपनी इस भारी गलती को सुधारने के लिए रेलवे प्रशासन ने तुरंत एक विशेष ऑपरेशन चलाया. मानिकपुर में छूटे हुए उस एसी कोच को अतर्रा तक सुरक्षित लाने के लिए एक अलग इंजन को तैनात किया गया. इस पूरी प्रक्रिया में रेल महकमे को करीब चार घंटे का समय लग गया. कोच पहुँचने के बाद उसे तकनीकी टीम की मौजूदगी में मुख्य ट्रेन के साथ दोबारा जोड़ा गया. इस लंबी और थका देने वाली देरी ने न केवल ट्रेन के शेड्यूल को बिगाड़ा. बल्कि रेलवे के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए.

यात्रियों का फूट पड़ा गुस्सा

ट्रेन की इस लंबी देरी और रेलवे प्रशासन की घोर लापरवाही ने आम यात्रियों के धैर्य का बांध पूरी तरह तोड़ दिया. चित्रकूटधाम कर्वी और अतर्रा स्टेशनों पर घंटों से फंसे हुए यात्रियों ने रेलवे के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन और हंगामा किया. भीषण गर्मी में घंटों तक प्यास और भूख के साथ इंतजार करने के कारण लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था. यात्रियों ने अधिकारियों से जवाब मांगा कि इतनी बड़ी सुरक्षा चूक कैसे हुई. जिससे उनकी महत्वपूर्ण यात्रा और समय की बर्बादी हुई.

चार घंटे की देरी के बाद आगे के लिए रवाना हुई ट्रेन 

स्थिति को काबू में करने के लिए रेलवे के सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा. अंततः चार घंटे की देरी के बाद पूरी व्यवस्था दुरुस्त हुई और ट्रेन को आगे की यात्रा के लिए सुरक्षित हरी झंडी दिखाई गई. रेलवे बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. दोषी अधिकारियों और लापरवाह कर्मचारियों पर गाज गिरना अब लगभग तय माना जा रहा है. भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो. इसके लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag