लादेन, मादुरो और अब...दुनिया की सबसे खतरनाक फोर्स ईरान में उतारने की तैयारी में अमेरिका, जानिए कौन है ट्रंप का अगला निशाना

अमेरिका और इजरायल अब ईरान में जमीनी ऑपरेशन करने की तैयारी कर रहे हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप अमेरिका की 'डेल्टा फोर्स' और इजरायल अपनी 'सायरेट मटकल' जो दुनिया की सबसे खतरनाक फोर्स हैं उसे ईरान भेजने की तैयारी कर रहे हैं.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध अब नया रूप ले रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हवाई हमलों के बाद जमीनी स्तर पर स्पेशल फोर्स उतारने की सोच रहे हैं. खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने वही टीम चुनी है जिसने 2011 में पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को ढेर किया था. वेनेजुएला के मादुरो ऑपरेशन में भी यही फोर्स सक्रिय रही. इजरायल पूरी तरह साथ है. दोनों देश मिलकर ईरान के सीक्रेट न्यूक्लियर अड्डों और मोजतबा खामेनेई के बंकर पर हमला करने की योजना बना रहे हैं. ये दुनिया की सबसे खतरनाक यूनिट्स हैं जिनके नाम से दुश्मन कांप उठते हैं.

क्या है अमेरिका का डेल्टा फोर्स ?

दरअसल, डेल्टा फोर्स अमेरिकी सेना की टॉप काउंटर टेरर यूनिट है. इसे 1977 में कर्नल चार्ल्स बेकविथ ने शुरू किया. यह यूनिट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के अंदर काम करती है. इसका काम है दुश्मन की लाइन के पीछे घुसना हाई वैल्यू टारगेट को खत्म करना और बंधकों को छुड़ाना. यह इतनी गोपनीय है कि जवान अपना चेहरा भी नहीं दिखाते. ऑपरेशन लादेन में यही टीम अबोटाबाद पहुंची थी. अब ईरान में न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज नष्ट करने या मोजतबा खामेनेई को टारगेट करने का मिशन इसका हो सकता है.

सायरेट मटकल क्या है ?

बता दें कि सायरेट मटकल इजरायल डिफेंस फोर्स की सबसे पुरानी स्पेशल यूनिट है. 1957 में बनी यह जनरल स्टाफ रेकॉनिसेंस यूनिट कहलाती है. इसका काम है दुश्मन इलाके में घुसपैठ करके जानकारी जुटाना और बड़े टारगेट को मारना. छोटी टीम में 8 से 12 जवान काम करते हैं. 1976 में उगांडा के एंटेबे में बंधक बचाने का ऑपरेशन इसी ने किया. कई अरब देशों में गुप्त हमले कर चुकी है. ईरान के पहाड़ी न्यूक्लियर बंकरों फोर्डो और नतांज में घुसने के लिए यह आदर्श है.

इन फोर्सेज के पास है सबसे प्रमुख आधुनिक हथियार

दोनों यूनिट्स के पास सबसे आधुनिक हथियार हैं. मुख्य रूप से HK416 और M4A1 कार्बाइन राइफल्स साइलेंसर के साथ इस्तेमाल होती हैं. ग्लॉक 17 या सिग सॉयर पिस्तौल साथ रहती है. स्नाइपर के लिए बैरेट M82 या SR-25 राइफल्स रखी जाती हैं. ग्रेनेड लॉन्चर सी4 विस्फोटक और ब्रिचिंग चार्ज भी जरूरी होते हैं. नाइट विजन गॉगल्स थर्मल इमेजिंग और ड्रोन मिशन को आसान बनाते हैं. जवान हल्का बॉडी आर्मर हेलमेट और कम्युनिकेशन डिवाइस पहनते हैं. हथियार हर ऑपरेशन के हिसाब से बदले जाते हैं.

इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग डिवाइस 

इन यूनिट्स के पास कुछ ऐसे हथियार हैं जिनकी डिटेल्स कभी सार्वजनिक नहीं होतीं. एडवांस्ड साइलेंट गन स्पेशल ड्रोन जो रडार में नहीं पकड़े जाते और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग डिवाइस जो दुश्मन का संपर्क काट देते हैं. कुछ रिपोर्ट्स में लेजर या डायरेक्टेड एनर्जी वेपन का जिक्र है जो बेहद गोपनीय हैं. ये उपकरण सिर्फ सबसे बड़े मिशनों में इस्तेमाल होते हैं. इनकी पूरी जानकारी सिर्फ यूनिट कमांडर और राष्ट्रपति स्तर तक सीमित रहती है.

क्या हैं इनकी ऑपरेशन टैक्टिक्स

ये फोर्सेज छोटी टीम में काम करती हैं. मुख्य तरीके हैं क्लोज क्वार्टर बैटल में कमरे में घुसकर दुश्मन को मारना HALO HAHO पैराशूट से ऊंचाई से उतरना पहले रेकॉनिसेंस से जानकारी जुटाना अचानक डायरेक्ट एक्शन से टारगेट खत्म करना और मिशन के बाद बिना पकड़े निकल जाना. रात के अंधेरे में काम करती हैं दुश्मन की भाषा बोलती हैं कभी उनकी वर्दी पहन लेती हैं. हर मिशन से पहले महीनों की कड़ी ट्रेनिंग होती है. ईरान में भी यही तरीका अपनाया जाएगा ड्रोन से जानकारी फिर बंकर में घुसपैठ और हेलीकॉप्टर से वापसी. 

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