चीन को ट्रंप की सख्त चेतावनी, ईरान को हथियार दिए तो झेलनी होंगी 'बड़ी समस्याएं'
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर चीन ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम या दूसरे हथियार देता है, तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. कुछ समय अस्थायी युद्धविराम के बावजूद, दोनों देशों के बीच हालात स्थिर नहीं हैं, जिससे चीन की संभावित भूमिका को लेकर वॉशिंगटन की चिंताएँ और बढ़ गई हैं.

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट तौर पर चेतावनी दी है कि अगर चीन ईरान को हवाई रक्षा प्रणाली या अन्य हथियार उपलब्ध कराता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे अस्थायी युद्धविराम के बावजूद हालात पूरी तरह स्थिर नहीं हैं. दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है और सैन्य गतिविधियां भी जारी हैं. ऐसे में चीन की संभावित भूमिका को लेकर वाशिंगटन की चिंता और गहरी हो गई है.
ट्रंप की सीधी चेतावनी
व्हाइट हाउस से मियामी रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा,"अगर चीन ऐसा करता है, तो चीन को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है,"
हालांकि उन्होंने इस पर विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी. यह जानकारी रॉयटर्स की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है.
खुफिया रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
यह चेतावनी CNN की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में ईरान को चीन से नए हवाई रक्षा सिस्टम मिल सकते हैं.
बताया गया है कि इन हथियारों की आपूर्ति के लिए बीजिंग तीसरे देशों का सहारा ले सकता है, ताकि उनके स्रोत को छिपाया जा सके.
युद्धविराम के बावजूद बढ़ता तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ है. दोनों देशों ने अब भी भारी सैन्य तैनाती कर रखी है.
अमेरिकी युद्धपोत और सेना ईरान के नजदीक मौजूद हैं, जबकि माना जा रहा है कि तेहरान हाल के अमेरिकी और इजरायली हमलों में क्षतिग्रस्त अपनी रक्षा प्रणाली को तेजी से मजबूत करने में जुटा है.
चीन ने आरोपों को किया खारिज
चीन ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है. वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि बीजिंग ने "संघर्ष में शामिल किसी भी पक्ष को हथियार मुहैया नहीं कराए हैं".
साथ ही अमेरिका से "बेबुनियाद आरोपों" और "सनसनीखेज बयानबाजी" से बचने की अपील की गई है.
कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है असर
ईरान को संभावित सैन्य सहायता को अमेरिका एक बड़ा उकसाने वाला कदम मानता है. इसका असर ट्रंप की आगामी चीन यात्रा और Xi Jinping के साथ प्रस्तावित बातचीत पर भी पड़ सकता है.
ईरान के लिए अहम सहयोगी
पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान के लिए चीन और रूस महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बने हुए हैं. ये देश उसे आर्थिक और कूटनीतिक समर्थन प्रदान करते हैं.
हथियारों को लेकर क्या कहती है रिपोर्ट
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित हथियारों में कंधे से दागी जाने वाली वायु रक्षा प्रणाली (मैनपैड) शामिल हो सकती है. इनका इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है.
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि हालिया झड़पों में ऐसी प्रणालियों का उपयोग पहले ही किया जा चुका है, जिनमें अमेरिकी लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों से जुड़े घटनाक्रम भी शामिल हैं.
ईरान का दावा और ट्रंप का बयान
ईरान ने इस मामले पर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने हालिया हमलों में एक "नई, उन्नत रक्षा प्रणाली" के इस्तेमाल का दावा किया है.
वहीं ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ "गहन वार्ता" कर रहा है, हालांकि उन्होंने संभावित समझौते को लेकर ज्यादा महत्व नहीं दिया. उन्होंने कहा, "हो सकता है वे समझौता कर लें, हो सकता है न करें - जो भी हो, जीत हमारी है."
साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने समुद्री क्षेत्रों में "कुछ बारूदी सुरंगें" बिछाई हो सकती हैं, जिन्हें हटाने के लिए अमेरिकी जहाज सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.


