पाकिस्तान में टीटीपी का 'ऑपरेशन खैबर' शुरू, सुरक्षाबलों और सरकारी ठिकानों को बनाया निशाना

पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने साल 2026 के लिए नए सैन्य अभियान 'ऑपरेशन खैबर' की घोषणा की है. संगठन ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाने के निर्देश दिए हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने वर्ष 2026 के लिए अपने नए सैन्य अभियान 'ऑपरेशन खैबर' की घोषणा कर दी है. संगठन की ओर से जारी संदेश में बताया गया है कि उनका वार्षिक अभियान ‘अल-खंदक’ समाप्त हो चुका है और उसकी जगह अब यह नया अभियान शुरू किया गया है.

टीटीपी के प्रवक्ता के अनुसार यह अभियान पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और सरकारी संस्थानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. संगठन ने अपने लड़ाकों को देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय होने और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के निर्देश दिए हैं.

कई जिलों में समन्वित हमलों का दावा

‘ऑपरेशन खैबर’ की घोषणा के साथ ही टीटीपी ने पाकिस्तान के कई क्षेत्रों में समन्वित हमले किए जाने का दावा किया है. रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों के भीतर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के अलग-अलग जिलों में कुल 31 हमले किए जाने की बात सामने आई है.

इन हमलों के बारे में संगठन का कहना है कि उत्तरी वजीरिस्तान जिले में 12 हमले किए गए, जबकि चित्राल जिले में 7 हमलों की जानकारी दी गई है. इसके अलावा उत्तरी वजीरिस्तान में ही 5 हमले और पेशावर, बन्नू तथा टैंक जिलों में 2-2 हमले किए जाने का दावा किया गया है. वहीं मोहम्मद जिले में 1 हमले की बात कही गई है. टीटीपी के अनुसार इन हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की चौकियों और गश्ती दलों को निशाना बनाया गया.

गुरिल्ला रणनीति के तहत होगा अभियान

टीटीपी का कहना है कि 'ऑपरेशन खैबर' के दौरान उनके लड़ाके गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाएंगे. इस अभियान में घात लगाकर हमले करना, सुरक्षा चौकियों पर हमला, स्नाइपर फायरिंग और आत्मघाती हमलों जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

संगठन के मुताबिक इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में अपनी विचारधारा और प्रभाव को और मजबूत करना है.

'अल-खंदक' अभियान का हुआ समापन

टीटीपी ने बताया कि उनका पिछला बड़ा सैन्य अभियान ‘अल-खंदक’ पिछले वर्ष शुरू किया गया था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है. इस अभियान के दौरान संगठन ने पाकिस्तान की सेना और पुलिस से जुड़े कई ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था.

हालांकि पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अक्सर इन दावों को संगठन की ओर से किया गया प्रचार बताती हैं और उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने की बात कहती हैं.

विशेषज्ञों ने जताई हिंसा बढ़ने की आशंका

सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि नए अभियान की घोषणा के बाद खासकर खैबर पख्तूनख्वा और पूर्ववर्ती कबायली इलाकों में हिंसा बढ़ सकती है. पिछले कुछ महीनों के दौरान इन क्षेत्रों में टीटीपी के हमलों में लगातार वृद्धि देखी गई है.

इसी के जवाब में पाकिस्तान की सेना भी आतंकियों के खिलाफ कई सैन्य अभियान चला रही है और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है.

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