अफवाहों के बीच तेल पर डर, सरकार बोली भारत के पास कई हफ्तों का ईंधन भंडार सुरक्षित

 ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल खत्म होने की अफवाह फैल गई थी, लेकिन सरकार ने साफ कहा है कि देश के पास कई हफ्तों का पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की खबरों के बीच भारत में अचानक पेट्रोल और डीजल को लेकर चिंता बढ़ गई और कई शहरों में लोगों ने यह मान लिया कि शायद जल्द ही ईंधन की कमी होने वाली है इसलिए पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें दिखने लगीं और कुछ लोग डिब्बों में भी पेट्रोल भरकर घर ले जाने लगे, सोशल मीडिया पर भी कई तरह की बातें फैलने लगीं जिनमें कहा गया कि देश में तेल तेजी से खत्म हो रहा है और सप्लाई रुक सकती है, लेकिन सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी बातों का कोई आधार नहीं है और देश में ईंधन की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है तथा नागरिकों को अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

सरकार ने क्या आंकड़ा बताया?

केंद्र सरकार ने हालात साफ करने के लिए आधिकारिक आंकड़े सामने रखे और बताया कि भारत के पास इस समय करीब पच्चीस करोड़ बैरल कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का संयुक्त भंडार मौजूद है जो लगभग चार हजार करोड़ लीटर के बराबर बैठता है, सरकार के मुताबिक यह स्टॉक देश की जरूरतों को कई हफ्तों तक आराम से पूरा कर सकता है और सप्लाई चेन पूरी तरह काम कर रही है, यानी अभी ऐसा कोई संकेत नहीं है कि देश में तेल की कमी होने वाली है और नागरिकों को किसी तरह की घबराहट में आने की जरूरत नहीं है।

कितने दिन चल सकता है देश?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत के पास जो तेल का संयुक्त भंडार मौजूद है वह करीब सात से आठ सप्ताह तक देश की जरूरतों को पूरा कर सकता है और सीधे शब्दों में कहें तो यह लगभग पचास से साठ दिनों का बैकअप माना जा रहा है, इसका मतलब यह है कि अगर दुनिया में कहीं अचानक सप्लाई में बाधा भी आती है तो भारत के पास इतना समय होगा कि वह नई सप्लाई का इंतजाम कर सके और आम लोगों की जिंदगी पर उसका असर न पड़े, इसलिए मौजूदा स्थिति को संकट नहीं बल्कि एहतियाती तैयारी माना जा रहा है।

तेल का भंडार आखिर कहाँ रखा?

भारत ने तेल का भंडार किसी एक जगह पर नहीं रखा बल्कि पूरे देश में रणनीतिक तरीके से अलग-अलग स्थानों पर स्टोर किया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सप्लाई जारी रखी जा सके, कर्नाटक के मैंगलोर और पादुर के अलावा आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बड़े भूमिगत तेल भंडार बनाए गए हैं जहाँ विशाल टैंक जमीन के नीचे सुरक्षित रखे गए हैं, इसके अलावा देश की रिफाइनरियों और डिपो में भी बड़े स्टोरेज टैंक मौजूद हैं और हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों में भी लगातार तेल बहता रहता है जो कुल भंडार का हिस्सा माना जाता है।

केवल कच्चा तेल ही क्यों?

भारत के पास सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं बल्कि तैयार ईंधन का भी बड़ा स्टॉक रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके, इस भंडार में पेट्रोल और डीजल के अलावा विमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एविएशन टर्बाइन फ्यूल भी शामिल है, इसके साथ ही घरेलू गैस के लिए एलपीजी और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए एलएनजी का भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, यानी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के ईंधन एक साथ सुरक्षित रखे गए हैं जिससे देश की अलग-अलग जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकें।

अफवाहें आखिर फैली कैसे?

पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर कई संदेश तेजी से फैलने लगे जिनमें दावा किया गया कि दुनिया में तेल की सप्लाई पूरी तरह रुकने वाली है और भारत के पास केवल पच्चीस दिनों का तेल बचा है, इन संदेशों को लोगों ने तेजी से शेयर किया और धीरे-धीरे यह डर आम लोगों तक पहुँच गया, लेकिन सरकार ने जांच के बाद साफ कहा कि ये दावे पूरी तरह गलत हैं और देश अभी भी रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और दूसरे कई देशों से लगातार तेल खरीद रहा है इसलिए सप्लाई चेन पूरी तरह सक्रिय है।

सरकार की जनता से क्या अपील?

सरकार ने लोगों से साफ अपील की है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और घबराकर पेट्रोल या डीजल जमा करने की कोशिश न करें क्योंकि इससे ही कृत्रिम संकट पैदा होता है, सरकार के मुताबिक देश की ऊर्जा आपूर्ति मजबूत है और कई तेल टैंकर समुद्र के रास्ते भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं जिससे आने वाले दिनों में भी सप्लाई सामान्य बनी रहेगी, इसलिए आम नागरिकों से कहा गया है कि वे सामान्य तरीके से ईंधन का इस्तेमाल करें और किसी भी तरह की गलत जानकारी फैलाने से बचें।

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