34 साल बाद आमने-सामने होंगे इजरायल-लेबनान? राष्ट्रपति ट्रंप ने की बड़ी घोषणा
मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और लेबनान के नेता 34 साल बाद बातचीत करने जा रहे हैं. ट्रंप की पहल से होने वाली यह बैठक क्षेत्र में शांति की दिशा में बड़ा संकेत मानी जा रही है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है, जिसने सभी का ध्यान खींचा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इजरायल और लेबनान के नेता करीब 34 साल बाद पहली बार आमने-सामने बातचीत करेंगे. इस प्रस्तावित बैठक को क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के नेताओं के बीच यह बातचीत गुरुवार को होने वाली है. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस बातचीत की जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि यह पहल दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और हालात में थोड़ी राहत लाने की कोशिश है.
किन नेताओं के बीच हो सकती है बातचीत?
हालांकि ट्रंप ने इस बैठक में शामिल होने वाले नेताओं के नाम साफ तौर पर नहीं बताए, लेकिन माना जा रहा है कि यह बातचीत इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के बीच हो सकती है. अगर ऐसा होता है, तो यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा.
अमेरिका की सक्रिय भूमिका
हाल ही में अमेरिकी विदेश विभाग में एक अहम बैठक भी हुई थी, जिसमें लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह और इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर शामिल हुए थे. इस चर्चा की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मारको रुबियो ने की. इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जो इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका इस पहल को गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है.
हिज्बुल्लाह का कोई प्रतिनिधि नहीं था शामिल
इस बातचीत में हिज्बुल्लाह का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं था, जो इस क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. वहीं, नवंबर 2024 में हुए सीजफायर समझौते के बावजूद जमीनी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं, जिससे यह साफ है कि स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है.
क्यों अहम है यह मीटिंग?
इजरायल और लेबनान के बीच संबंध हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं. 1948 से दोनों देश तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं और उनके बीच कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं है. आखिरी बार 1983 में अमेरिका की मध्यस्थता से शीर्ष स्तर पर बातचीत हुई थी. इसके बाद 1993 में भी बातचीत हुई, लेकिन वह नेताओं के स्तर की नहीं थी.
क्या मिलेगी राहत?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बैठक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, जमीनी चुनौतियां और हिज्बुल्लाह की भूमिका इस प्रक्रिया को कठिन बना सकती हैं. इसके बावजूद, 34 साल बाद होने वाली यह सीधी बातचीत क्षेत्र में शांति की नई उम्मीद के रूप में देखी जा रही है.


