भोपाल: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ककनमठ मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और रहस्यमयी कथाओं के कारण लंबे समय से लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. जिले के सिहोनिया गांव में मौजूद यह प्राचीन शिव मंदिर न केवल आस्था का प्रमुख स्थल है, बल्कि इसके निर्माण को लेकर भी पर्यटकों के बीच कई कहानियां प्रचलित है, जो इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर खींचती है.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण सामान्य इंसानों ने नहीं बल्कि अलौकिक शक्तियों ने किया था. गांव के बुजुर्गों के बीच यह कथा काफी प्रचलित है कि इस मंदिर को भूतों द्वारा एक ही रात में बनाया जा रहा था, लेकिन सूर्योदय से पहले निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। इसी वजह से मंदिर अधूरा रह गया. इस कहानी के चलते आज भी मंदिर को लेकर कई रहस्यमयी चर्चाएं सुनने को मिलती है.
हालांकि इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञ इस लोककथा को ऐतिहासिक तथ्यों से अलग मानते हैं. उनके अनुसार, ककनमठ मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कच्छपघाट राजवंश के समय कराया गया था. माना जाता है कि तत्कालीन शासक राजा कीर्तिराज ने भगवान शिव को समर्पित इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था. मंदिर उस दौर की उत्कृष्ट स्थापत्य कला और इंजीनियरिंग कौशल का शानदार उदाहरण माना जाता है.
करीब 100 फीट ऊंचा यह मंदिर विशाल पत्थरों से निर्मित है. इसकी सबसे खास बात यह है कि संरचना में कहीं भी आधुनिक सीमेंट या गारे का उपयोग दिखाई नहीं देता. इसके बावजूद सदियों से यह मंदिर मजबूती के साथ खड़ा है. यहीं समय, मौसम और प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करने के बाद भी इसकी भव्यता आज तक बरकरार है.
मुरैना शहर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस ऐतिहासिक धरोहर पर सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है. अक्टूबर से मार्च के बीच का मौसम यहां घूमने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. वहीं यहां का धार्मिक महत्व, ऐतिहासिक विरासत और रहस्य से जुड़ी कहानियां काकनमठ मंदिर को मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करता है. First Updated : Wednesday, 17 June 2026