Cancer Cases: दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही कैंसर की बीमारी अब भारत में भी गहरी चिंता का विषय बनती जा रही है. यह खतरनाक बीमारी शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है और अगर समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकती है. हाल ही में प्रकाशित एक नई स्टडी से यह साफ हुआ है कि भारत में कैंसर के सबसे अधिक मामले कहां सामने आ रहे हैं और किन कारणों से इसका खतरा अधिक बढ़ रहा है.
JAMA नेटवर्क में प्रकाशित इस अध्ययन में देशभर के कैंसर डेटा का विश्लेषण किया गया. जिससे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. शोध में पाया गया कि राजधानी दिल्ली में पुरुषों में कैंसर के मामले सबसे अधिक हैं, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले आम हैं.
इस स्टडी के अनुसार दिल्ली कैंसर के मामलों में देशभर में सबसे उपर है खासकर पुरुषों में. इनमें सबसे आम प्रकार के कैंसर हैं:-
लंग (फेफड़े का कैंसर)
ओरल (मुंह का कैंसर)
प्रोस्टेट कैंसर
ब्रेस्ट कैंसर
सर्वाइकल कैंसर
ओवेरियन कैंसर
श्रीनगर में लंग कैंसर सबसे अधिक
इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में फेफड़ों के कैंसर के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं. यह संकेत देता है कि केवल महानगर ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी गंभीर स्वास्थ्य संकट मंडरा रहा है.
1. वायु प्रदूषण
दिल्ली की खराब एयर क्वालिटी यहां कैंसर के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण मानी जा रही है. हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों को प्रभावित करते हैं, जिससे लंग कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
2. निष्क्रिय जीवनशैली (इनएक्टिव लाइफस्टाइल)
तेज रफ्तार जीवन और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के चलते लोगों में प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ गया है.
3. तंबाकू और धूम्रपान का सेवन
दिल्ली में ओरल कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे एक बड़ा कारण तंबाकू और गुटखा जैसी चीजों का अत्यधिक सेवन भी है.
पुरुषों में कैंसर के आम लक्षण
त्वचा में असामान्य बदलाव
यूरिन या मल में खून आना
निगलने में परेशानी
शरीर में गांठ या सूजन
लगातार थकावट या दर्द
वजन में अचानक कमी
खांसी या गले का बैठ जाना
मल त्याग की आदतों में बदलाव
यह स्टडी भारत में कैंसर को लेकर गंभीर चेतावनी देती है. विशेष रूप से दिल्ली जैसे महानगरों में वातावरणीय और जीवनशैली संबंधी कारकों के कारण कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वस्थ जीवनशैली, और प्रदूषण नियंत्रण जैसे उपाय अपनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है. First Updated : Saturday, 06 September 2025