जब गर्मियां आती हैं तो आपको बाज़ार में तरबूज़ों की कतारें दिखाई देती हैं. कई लोग सूरज की किरणों से बचने और शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखने के लिए तरबूज खाना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जो तरबूज खा रहे हैं वह सचमुच प्राकृतिक है? या रसायनों से भरा हुआ? बिना उचित जानकारी के, स्वाद के लिए खाया जाने वाला तरबूज स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है!
गर्मियों में तरोताजा रहने के लिए तरबूज एक बेहतरीन विकल्प है. वर्तमान में बाजार में विभिन्न प्रकार के तरबूज उपलब्ध हैं. लेकिन इसके साथ ही, कैंसर सहित कुछ खतरनाक बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं. कुछ तरबूजों में रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है. इसलिए तरबूज खरीदते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, नहीं तो आपका पूरा परिवार बीमार पड़ सकता है.
यदि तरबूज का मध्य भाग बहुत लाल और चमकदार दिखता है, तो संभवतः वह नकली है. यदि इसे काटते समय इसमें से झाग निकलता है, तो इसे बिल्कुल न खाएं. रासायनिक उपचार से प्राप्त तरबूज का स्वाद थोड़ा अलग और कुछ हद तक कृत्रिम हो सकता है. इसके अलावा, यदि छिलका बहुत चमकदार या अस्वाभाविक रूप से चिकना दिखता हो तो इसे खरीदने से बचें. ऐसी शिकायतें भी बढ़ रही हैं कि बाजार में ऐसे नकली तरबूजों से उपभोक्ताओं को ठगा जा रहा है.
तरबूज़ को खाने से पहले उसे 30 मिनट तक ठंडे पानी में भिगोएँ. ऐसा तरबूज न खरीदें जो बहुत अधिक चमकीला लाल हो. बाजार से कटा हुआ तरबूज खरीदने से बचें, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया होने की संभावना होती है. घर पर काटते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसमें फोम या रसायन जैसी गंध न हो. ये छोटे-छोटे उपाय आपको सुरक्षित रख सकते हैं.
बाजार में उपलब्ध कुछ तरबूजों को जल्दी पकाने के लिए उनमें ईथर, कार्बाइड या रंग जैसे रसायनों का प्रयोग किया जाता है. यदि इन रसायनों को निगल लिया जाए तो कैंसर, यकृत क्षति, गुर्दे की समस्याएं और हार्मोन असंतुलन हो सकता है. कुछ विक्रेता गारा को अधिक लाल दिखाने के लिए उसमें कृत्रिम रंग मिला देते हैं. यदि ये रंग खाद्य-ग्रेड नहीं हैं, तो ये कैंसर को आमंत्रित कर सकते हैं. इसके अलावा, यदि तरबूज को लंबे समय तक संग्रहीत किया जाए या ठीक से संग्रहीत न किया जाए, तो उसमें फफूंद लग सकती है. यह कवक 'एफ्लाटॉक्सिन' नामक विष उत्पन्न करता है, जो यकृत कैंसर के खतरे को बढ़ाता है. First Updated : Friday, 02 May 2025