उमामी के बिना अधूरी है ज़ायके की कहानी, भारतीय व्यंजनों में स्वाद का है नया राज़
'उमामी' को स्वाद का पांचवां तत्व माना गया है, जो खाने में गहराई और संतुलन लाता है. विज्ञानियों के अनुसार, यह स्वाद हमें प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों में मिलता है और अब भारतीय व्यंजन में भी इसकी अहमियत बढ़ती जा रही है.

अक्सर जब कोई डिश हमारे मुंह में जाते ही एक गहरा, संतोषजनक स्वाद छोड़ती है, तो हम कहते हैं 'वाह, क्या स्वाद है!' लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा अनोखा स्वाद किस वजह से आता है? इसका जवाब है उमामी, जिसे स्वाद का पांचवां तत्व माना जाता है.
हालांकि 'उमामी' शब्द की उत्पत्ति जापान से हुई है, लेकिन इसका प्रभाव हमारे भारतीय खाने में लंबे समय से मौजूद है. टमाटर की रिच ग्रेवी, पनीर की स्पाइसी सब्जी, सोया या इमली की चटनी, मशरूम से बना पुलाव, ये सभी डिशेज़ उमामी के अनोखे स्वाद से भरपूर होते हैं, चाहे हमने इसे पहचाना हो या नहीं.
उमामी क्या है?
उमामी स्वाद दरअसल एक प्राकृतिक अमीनो एसिड ग्लूटामेट से आता है, जो बहुत से भारतीय फूड आइटम्स जैसे टमाटर, पनीर, मशरूम, सोया सॉस आदि में पाया जाता है. यही वह तत्व है जो खाने को 'माउथफिल' यानी पूरा और संतोषजनक बनाता है. जब कोई डिश स्वाद में गहराई और बैलेंस लाती है, तो उसमें अक्सर उमामी की भूमिका होती है.
हर साल 25 जुलाई को विश्व उमामी दिवस (World Umami Day) के तौर पर मनाया जाता है. यह दिन दुनिया भर में इस विशेष स्वाद की अहमियत को उजागर करने के लिए चुना गया है. इस मौके पर मशहूर शेफ अजय चोपड़ा ने दो ऐसी रेसिपीज़ शेयर की हैं जो उमामी को देसी फ्लेवर के साथ बेहतरीन तरीके से मिलाती हैं।
भारत में उमामी का महत्व
भले ही उमामी को वैज्ञानिक रूप से हाल के दशकों में पहचाना गया हो, लेकिन भारतीय किचन में यह स्वाद हमेशा मौजूद रहा है. हमारी ग्रेवीज़, अचार, दालों में पड़ने वाला हींग, पनीर और दही ये सब उमामी के नैचुरल सोर्स हैं. टमाटर, इमली, मेथी, मशरूम और सोया सब मिलकर स्वाद में गहराई और संतुलन लाते हैं.


