बंगाल जीत के बाद अब यूपी मिशन पर शाह, जून से शुरू हो सकता है दौरा
अमित शाह अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जून से सितंबर तक राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर संगठन और राजनीतिक हालात का जायजा लेंगे.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मिली बड़ी चुनावी सफलता के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब उत्तर प्रदेश पर पूरा फोकस करने की तैयारी में हैं. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने अभी से रणनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक अमित शाह जून से सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर संगठन और राजनीतिक हालात की समीक्षा करेंगे. इस दौरान वे स्थानीय नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर जमीनी फीडबैक लेंगे और उसी आधार पर आगामी चुनावी रणनीति तैयार की जाएगी.
जून से शुरू हो सकता है शाह का दौरा
सूत्रों के अनुसार शाह का उत्तर प्रदेश दौरा जून महीने से शुरू हो सकता है. हालांकि आधिकारिक कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती चरण में उनके बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र के दौरे की तैयारी की जा रही है. इन दौरों के दौरान वे स्थानीय मुद्दों, जातीय और सामाजिक समीकरणों तथा बूथ स्तर तक संगठन की स्थिति का आकलन करेंगे. भाजपा नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर की तैयारियों को मजबूत करना जरूरी है.
भाजपा ने संगठनात्मक दृष्टि से उत्तर प्रदेश को छह हिस्सों पश्चिमी उत्तर प्रदेश, काशी, बुंदेलखंड, ब्रज, अवध और गोरखपुर में विभाजित किया हुआ है. योजना के मुताबिक जून से सितंबर तक अमित शाह इन सभी क्षेत्रों का दौरा कर सकते हैं. इसके बाद अक्टूबर से पार्टी बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के अभियान में जुट जाएगी.
2024 लोकसभा चुनाव में खास प्रदर्शन नहीं
पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. 2014 में जहां भाजपा ने अकेले 71 सीटें जीती थीं, वहीं 2019 में यह आंकड़ा 62 रहा. लेकिन 2024 के चुनाव में पार्टी 32 सीटों तक सिमट गई. इसी तरह विधानसभा चुनावों में भी भाजपा का प्रदर्शन पहले की तुलना में कमजोर हुआ है. 2017 में भाजपा ने 312 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में यह संख्या घटकर 255 रह गई.
ऐसे में भाजपा अब पश्चिम बंगाल में अपनाई गई चुनावी रणनीति को उत्तर प्रदेश में लागू करने पर विचार कर रही है. पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान पार्टी ने राज्य को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर वरिष्ठ नेताओं और संगठन पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी थी. इसी मॉडल को बिहार और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भी इस्तेमाल किया गया था, जहां भाजपा को सकारात्मक नतीजे मिले थे. अब पार्टी को उम्मीद है कि इसी रणनीति के जरिए उत्तर प्रदेश में भी पुराने प्रदर्शन को दोहराया जा सकता है.


