Chaitra Navratri 2026: इस मुहूर्त में करें कन्या पूजन,बनेंगे बिगड़े काम और मिलेगी मां की कृपा
चैत्र नवरात्र की महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व है. आज सुबह 6:17 से 10:08 तक शुभ मुहूर्त है. रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग में पूजा करने से विशेष फल मिलता है.

चैत्र नवरात्र का अंतिम दिन बेहद खास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है. इस दिन को महानवमी या रामनवमी के रूप में मनाया जाता है, जब नौ दिनों तक चली देवी आराधना अपने समापन पर पहुंचती है. भक्त पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, जिसे नवरात्र का सबसे अहम अनुष्ठान माना जाता है.
इस साल नवमी तिथि की शुरुआत 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर हो चुकी थी और इसका समापन 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 06 मिनट पर होगा. ऐसे में कन्या पूजन के लिए आज सुबह 6 बजकर 17 मिनट से लेकर 10 बजकर 08 मिनट तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है. इसी समय में पूजा और कन्या पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.
इस बार बन रहा है खास संयोग
इस वर्ष महानवमी का दिन और भी खास बन गया है क्योंकि इस दिन रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये दोनों योग बहुत शुभ माने जाते हैं. कहा जाता है कि इन योगों में किए गए पूजा-पाठ से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है.
मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
महानवमी के दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व होता है. माना जाता है कि मां का यह स्वरूप भक्तों को सिद्धियां प्रदान करता है और उनकी हर मनोकामना पूरी करता है. सच्चे मन से की गई पूजा पूरे नवरात्र के व्रत और साधना का फल देती है और जीवन की परेशानियों को दूर करती है.
पूजा करने की आसान विधि
सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और मां सिद्धिदात्री के सामने घी का दीपक जलाएं. उन्हें फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. अगर संभव हो तो नौ प्रकार के भोग लगाना शुभ माना जाता है. इसके बाद ‘ऊं ह्रीं दुर्गाय नमः’ मंत्र का श्रद्धा से जाप करें. पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद पहले जरूरतमंद लोगों में बांटें और फिर स्वयं ग्रहण करें.
कन्या पूजन की विधि
नवरात्र के समापन पर कन्या पूजन किया जाता है. इसमें छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनका आदर-सत्कार किया जाता है. उनके पैर धोकर तिलक लगाया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है. इस दिन हलवा, पूरी और चने का प्रसाद विशेष रूप से बनाया जाता है. कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी बैठाया जाता है, जिसे भैरव का रूप माना जाता है.
कन्या पूजन का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि 2 से 10 वर्ष की कन्याएं मां दुर्गा का स्वरूप होती हैं. हर उम्र की कन्या का अपना अलग महत्व बताया गया है. इनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति आती है, बीमारियां दूर होती हैं और जीवन में सफलता के रास्ते खुलते हैं.


