Chaitra Navratri 2026: आज छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना, जानें पूजन विधि और प्रभावी उपाय

चैत्र नवरात्र का छठा दिन देवी उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है, जिन्हें शक्ति, साहस और विवाह संबंधी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली देवी माना जाता है. भक्त पूरे विधि-विधान से उनकी आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

चैत्र नवरात्रि 2026: चैत्र नवरात्र का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित होता है। इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा ने महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उनके आश्रम में पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसलिए उन्हें कात्यायनी नाम से जाना जाता है.

मां कात्यायनी को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है. उन्होंने नवरात्र के नौ दिनों में महिषासुर का वध किया था, जिसके कारण उन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है.

माता कात्यायनी की चार भुजाएं होती हैं. वे अपने हाथों में अस्त्र-शस्त्र और कमल धारण करती हैं तथा उनका वाहन सिंह है. मां कात्यायनी को ब्रज की कुलदेवी माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि ब्रज की गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए उनकी उपासना की थी. इसी कारण मां कात्यायनी को विवाह संबंधी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी माना जाता है.

मां कात्यायनी का महत्व

माता कात्यायनी की पूजा विशेष रूप से विवाह से जुड़ी इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए की जाती है. ऐसी मान्यता है कि उनकी कृपा से योग्य और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है. ज्योतिष शास्त्र में विवाह के कारक ग्रह बृहस्पति का संबंध भी मां कात्यायनी से जोड़ा जाता है.

तंत्र साधना में इनका संबंध आज्ञा चक्र से बताया गया है. जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो या किसी प्रकार की बाधा आ रही हो, उनके लिए मां की उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है. साथ ही, प्रेम विवाह और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए भी इनकी आराधना लाभकारी मानी गई है. यहां तक कि कुंडली में विवाह योग कमजोर होने पर भी मां की कृपा से रास्ते खुल सकते हैं.

पूजन विधि

मां कात्यायनी की पूजा गोधूलि बेला यानी सूर्यास्त के समय करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है. इस दौरान साधक को पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए. पूजा में मां को पीले फूल, पीली मिठाई और पीला नैवेद्य अर्पित करना चाहिए.

शहद का भोग चढ़ाना अत्यंत लाभकारी माना गया है. साथ ही, सुगंधित फूल अर्पित करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. पूजा के बाद मां के मंत्रों का जप या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शुभ फलदायी होता है.

शीघ्र विवाह के लिए उपाय

जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो पा रहा है, वे गोधूलि बेला में पीले वस्त्र पहनकर मां कात्यायनी के समक्ष घी का दीपक जलाएं. इसके बाद पीले फूल अर्पित करें और हल्दी की तीन गांठें चढ़ाएं.

इसके पश्चात इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें-
"कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि, नंदगोप सुतं देवि पति मे कुरु ते नमः"

पूजा समाप्त होने के बाद हल्दी की गांठों को पीले कपड़े में बांधकर अपने पास या बेडरूम में रखें. ऐसा करने से विवाह के योग मजबूत होते हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की संभावना बढ़ती है.

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