आईपीएल के बीच पाकिस्तान में हुआ चमत्कार! बाबर आजम ने PSL में जड़ा अजीबोगरीब शतक
T20 क्रिकेट के इतिहास में किसी भी बल्लेबाज़ ने एक पारी में 50 या उससे ज़्यादा गेंदें खेलने के बाद एक या उससे कम डॉट बॉल नहीं खेली हैं। जो बाबर की इस पारी को और भी ज़्यादा असाधारण बनाती है।

नई दिल्ली: बीते रविवार (19 अप्रैल 2026) को कराची के नेशनल स्टेडियम में क्वेटा ग्लैडिएटर्स के ख़िलाफ़ PSL 2026 के मुक़ाबले में पेशावर ज़ल्मी के लिए खेलते हुए बाबर आज़म ने 52 गेंदों में एक शानदार सेंचुरी ठोक दी। यह उनकी तीसरी PSL सेंचुरी थी, जिसके साथ ही उन्होंने इस टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज़्यादा सेंचुरी बनाने के मामले में राइली रूसो, उस्मान ख़ान और कामरान अकमल की बराबरी कर ली।
बाबर आजम के बल्ले से आई तूफ़ानी पारी
आपको बताते चलें कि यह बाबर आजम की अब तक की सबसे तेज़ PSL सेंचुरी भी थी, लेकिन जिस बात ने सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा, वह था उनका ज़बरदस्त कंट्रोल। उन्होंने पूरी पारी में सिर्फ़ एक डॉट बॉल खेली। 14वें ओवर की आख़िरी गेंद पर उन्होंने अल्ज़ारी जोसेफ़ की एक बाउंसर को झुककर जाने दिया। इसके अलावा, उन्होंने हर गेंद पर रन बनाए, और ज़ल्मी को 3 विकेट पर 255 रनों के विशाल स्कोर तक पहुँचाया।
दरअसल T20 क्रिकेट के इतिहास में किसी भी बल्लेबाज़ ने एक पारी में 50 या उससे ज़्यादा गेंदें खेलने के बाद एक या उससे कम डॉट बॉल नहीं खेली हैं। जो बाबर की इस पारी को और भी ज़्यादा असाधारण बनाती है। असल में उन्होंने बिना कोई डॉट बॉल खेले, मात्र 31 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था। इसके अलावा आजम ने 67 पारियों के बाद T20 फॉर्मेट में कोई सेंचुरी बनाई।
काफी आलोचनाओं के बीच आया शतक
T20 क्रिकेट में अपने संयमित रवैये के लिए बाबर आजम को अक्सर आलोचना का सामना करना पड़ा है, ख़ासकर उन पिचों पर जहाँ बल्लेबाज़ों को मदद मिलती है। लगातार तेज़ी से रन बनाने में उनकी नाकामी और उनके स्ट्राइक रेट को लेकर उठने वाले सवालों पर अक्सर बहस होती रही है। ऐसी भी धारणा रही है कि उन्होंने इस फ़ॉर्मेट की बदलती ज़रूरतों के हिसाब से अपने खेल में पूरी तरह से बदलाव नहीं किया है।
गौरतलब है कि T20 वर्ल्ड कप 2026 का उनका सफ़र काफ़ी मुश्किलों भरा रहा था, जिसमें पाकिस्तान सेमीफ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई करने में नाकाम रहा था। लेकिन रविवार को बाबर आजम ने इस पूरी कहानी को ही बदल दिया। उन्होंने शुरू से ही सकारात्मक रवैया अपनाया और पूरी आज़ादी के साथ बल्लेबाज़ी की, जिससे उनका इरादा साफ़ ज़ाहिर हो रहा था।


