शोक में डूबा खेल जगत, पूर्व अंपायर विक्रम राजू ने 92 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

क्रिकेट जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक और ऐतिहासिक मुकाबलों में से एक के गवाह रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर वी. विक्रम राजू का रविवार को निधन हो गया.

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नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक और ऐतिहासिक मुकाबलों में से एक के गवाह रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर वी. विक्रम राजू का रविवार को निधन हो गया. वह 92 वर्ष के थे. उनके निधन पर कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ ने गहरा शोक व्यक्त किया है. संघ ने अपने बयान में कहा कि विक्रम राजू ने कई दशकों तक पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेल की सेवा की.

वह ऐतिहासिक फैसला जिसने बदल दिया इतिहास

विक्रम राजू का नाम क्रिकेट इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज है. उन्हें मुख्य रूप से साल 1986 में चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए ऐतिहासिक टेस्ट मैच के लिए याद किया जाता है. यह मुकाबला क्रिकेट इतिहास का केवल दूसरा 'टाई टेस्ट' था. इससे पहले साल 1960 में ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच पहला टाई टेस्ट खेला गया था.

348 रनों का लक्ष्य

चेन्नई टेस्ट के उस अंतिम और सांसें रोक देने वाले क्षण में भारत को जीत के लिए 348 रनों का लक्ष्य मिला था. मैच के आखिरी पलों में भारतीय टीम 347 रनों पर खड़ी थी और उसे जीत के लिए महज 1 रन की दरकार थी. जबकि ऑस्ट्रेलिया को मैच टाई कराने के लिए 1 विकेट चाहिए था.

मनिंदर सिंह को LBW आउट दिया

ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर ग्रेग मैथ्यूज की गेंद मनिंदर सिंह के पैड पर लगी. अंपायर विक्रम राजू ने मनिंदर सिंह को LBW आउट दिया. इस फैसले के साथ ही भारतीय पारी 347 रन पर सिमट गई और मैच टाई हो गया. इस ऐतिहासिक और कड़े फैसले के बाद विक्रम राजू को काफी समय तक आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था. 

अंपायरिंग और क्रिकेट में योगदान

अगर विक्रम राजू के पूरे करियर पर नजर डालें तो उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2 टेस्ट मैचों और 5 ODI मैचों में अंपायरिंग की थी. इसके अलावा, घरेलू क्रिकेट में उनका योगदान अतुलनीय रहा. जहां उन्होंने कुल 42 फर्स्ट क्लास मैचों में अंपायर की भूमिका निभाई.

संन्यास लेने के बाद भी क्रिकेट से दूर नहीं हुए

मैदानी अंपायरिंग से संन्यास लेने के बाद भी विक्रम राजू क्रिकेट से दूर नहीं हुए. उन्होंने मैच रेफरी के तौर पर खेल में अपना योगदान जारी रखा. जिसके तहत उन्होंने 4 प्रथम श्रेणी मैचों की निगरानी की. इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय स्तर पर कर्नाटक प्रीमियर लीग में भी मैच रेफरी और अंपायरिंग की जिम्मेदारियां बखूबी संभालीं. First Updated : Monday, 08 June 2026