भारत ने अहमदाबाद में कैसे इतिहास पलट कर तीसरी बार जीती ट्रॉफी? कोच गौतम गंभीर ने खोले सारे राज
रविवार को खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मैच में भारत ने शानदार प्रदर्शन कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली है. जीत के बाद गौतम गंभीर ने एक इंटरव्यू के दौरान कई बड़े खुलासे किए हैं.

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में इतिहास रच दिया. कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में टीम ने फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर तीसरी बार खिताब जीता. यह जीत घरेलू मैदान पर हुई और भारत पहली टीम बनी जो लगातार दो बार यह ट्रॉफी जीती.
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद हेड कोच गौतम गंभीर ने एक इंटरव्यू में खुलकर बात की. उन्होंने टीम की जीत का राज बताया और अपनी कोचिंग फिलॉसफी शेयर की.
हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड का मंत्र
गंभीर ने कहा कि टी20 क्रिकेट में सफलता का असली राज है ‘जितना बड़ा रिस्क, उतना बड़ा रिवॉर्ड’. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने टीम के साथ काम शुरू किया तो साफ सोच थी कि इस फॉर्मेट में डिफेंसिव खेलकर नहीं जीता जा सकता.
टीम को डोमिनेट करना होगा. "टी20 में 120 या 240 गेंदों में जितना ज्यादा असर डालो, उतना अच्छा. बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए आक्रामक होना जरूरी है. हमने टीम को यही सिखाया कि डरकर नहीं खेलना है."उन्होंने जोर दिया कि 160-170 रन के स्कोर से काम नहीं चलेगा. टीम को 250-260 जैसे बड़े स्कोर बनाने चाहिए, भले ही रिस्क ज्यादा हो.
गंभीर ने खिलाड़ियों को सलाह दी
गंभीर ने खिलाड़ियों को सलाह दी कि मैच में व्यक्तिगत रिकॉर्ड या माइलस्टोन के बारे में न सोचें. इससे टीम को 15-20 रन का नुकसान हो सकता है, जो जीत-हार का फर्क बना देता है." क्रिकेट टीम गेम है. अगर खिलाड़ी अपने सेंचुरी या रिकॉर्ड के बारे में सोचेगा तो टीम का नुकसान होगा. इम्पैक्ट सबसे महत्वपूर्ण है, रन नहीं."
संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा पर बात
टूर्नामेंट से पहले संजू सैमसन का फॉर्म चिंता का विषय था, लेकिन गंभीर ने कहा कि कोई टीम ऐसा नहीं होती जहां सभी खिलाड़ी एक साथ फॉर्म में हों. संजू ने विश्व कप में कमाल किया और उनकी पारी ड्रीम जैसी थी.
अभिषेक शर्मा के बारे में उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट रन से ज्यादा इम्पैक्ट देखती है. 20 गेंद में 20 रन बनाने वाला खिलाड़ी टीम के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
टीम चयन का आधार
गंभीर ने टीम सिलेक्शन पर कहा कि चयन ट्रस्ट और फेथ पर हुआ, होप पर नहीं. खिलाड़ियों पर पूरा भरोसा था कि मौका मिलने पर वे प्रदर्शन करेंगे. ड्रेसिंग रूम में 15 के 15 खिलाड़ी एकजुट थे और टीम पहले, खुद बाद में सोचते थे.
आलोचनाओं की परवाह नहीं
कोच ने कहा कि बाहरी आलोचनाओं से उन्हें फर्क नहीं पड़ता. उनका फोकस सिर्फ टीम और खिलाड़ियों पर है. ड्रेसिंग रूम का माहौल शानदार है और यही एकजुटता बड़ी जीत दिलाती है.
गंभीर ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी टीम इसी आक्रामक सोच के साथ खेलेगी. यह इंटरव्यू दिखाता है कि गंभीर की सख्त लेकिन सकारात्मक सोच ने टीम को चैंपियन बनाया. वीडियो में उनकी बातें फैंस को बहुत पसंद आ रही हैं.


