पटनाः छठ पर्व के समापन के साथ ही बिहार की राजनीति में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है. राज्यभर में अब राजनीतिक दल पूरी ताकत से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दोनों ही मतदाताओं को साधने के लिए रणनीतियां बना रहे हैं. आने वाले कुछ हफ्तों में बिहार के सभी जिलों में रैलियाँ, जनसभाएँ और प्रचार अभियान शुरू हो जाएंगे.
पटना में कांग्रेस नेता कृष्णा अल्लावारू ने सोमवार को बिहार के लिए महागठबंधन की कुछ प्रमुख गारंटियां साझा कीं. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि महागठबंधन सरकार बनने पर राज्य की जनता के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू करेगा.
1. महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक वित्तीय सहायता
2. सभी नागरिकों को 25 लाख रुपये तक का मुफ्त चिकित्सा उपचार कवरेज
3. भूमिहीन परिवारों को 3 से 5 डिसमिल भूमि का आवंटन
इन घोषणाओं के ज़रिए महागठबंधन महिलाओं, गरीबों और ग्रामीण तबकों को साधने की कोशिश कर रहा है. पार्टी नेताओं का कहना है कि बिहार की जनता को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने का समय आ गया है.
कांग्रेस, राजद और अन्य सहयोगी दलों वाला महागठबंधन आज पटना में अपना आधिकारिक चुनावी घोषणापत्र जारी करेगा. इसमें बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा सुधार और किसान कल्याण जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है. महागठबंधन की ओर से कहा गया है कि इस बार घोषणापत्र “जनता के मुद्दों” पर आधारित होगा, न कि केवल राजनीतिक वादों पर.
दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गया है. भाजपा और जदयू नेता राज्य के विभिन्न जिलों में रैलियाँ करने की तैयारी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आने वाले दिनों में संयुक्त जनसभाएँ कर सकते हैं.
महागठबंधन की प्रमुख घटक पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल 27 नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया. पार्टी मुख्यालय से जारी बयान में कहा गया कि इन नेताओं पर या तो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने या पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने के आरोप हैं.
राजद के बयान में कहा गया कि बिहार विधानसभा आम चुनाव 2025 में पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने या विरोध करने की शिकायतें मिली थीं. इन सभी नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए निष्कासित किया जाता है. इस कदम से राजद ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन अनुशासनहीनता को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा.
छठ के बाद बिहार का माहौल पूरी तरह से चुनावी हो गया है. महागठबंधन जहां सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता की बात कर रहा है, वहीं एनडीए अपने “विकास और स्थिरता” के एजेंडे को सामने रख रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव 2025 राज्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
First Updated : Tuesday, 28 October 2025