बेंगलुरु: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनते समय सिद्दरमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री पद की शर्त रखी गई थी। तीन साल बाद अब नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी से बातचीत के बाद सिद्दरमैया राज्य की सत्ता छोड़कर राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि शर्त यह है कि मंत्रिमंडल और राज्यसभा के दूसरे नामों में उनकी पसंद को तवज्जो दी जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों नेताओं के साथ पहले अलग-अलग और फिर एक साथ बैठक की। शुरुआत में सिद्दरमैया तैयार नहीं थे। पहले भी कई बार पार्टी में इस मुद्दे पर बैठकें हो चुकी थीं, लेकिन सिद्दरमैया राजी नहीं हुए थे।
कांग्रेस बिना उनकी सहमति के कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। वजह साफ है, विधानसभा में सिद्दरमैया के समर्थक विधायकों की संख्या ज्यादा है। सोमवार को दोनों नेता अपने-अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे थे।
बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा कि आप जो अंदाजा लगा रहे हैं वह सिर्फ अंदाजा है। आज हमने कर्नाटक की राज्यसभा सीटों और विधान परिषद सीटों पर चर्चा की।
उनके साथ सिद्दरमैया और शिवकुमार भी मौजूद थे। वेणुगोपाल ने बताया कि कर्नाटक की सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के साथ की जाएगी। किसी और बात पर चर्चा नहीं हुई।
हालांकि विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सिद्दरमैया अगले कुछ दिनों में इस्तीफा दे सकते हैं। एक जून को राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। माना जा रहा है कि जब सिद्दरमैया राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे, तभी डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
गौरतलब है कि पार्टी हाईकमान सिद्दरमैया को नाराज नहीं करना चाहता। इसलिए उन्हें राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी है। साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार और बाकी नामांकन में उनकी राय को अहमियत दी जाएगी। इससे कर्नाटक में सत्ता का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद कर्नाटक कांग्रेस में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। First Updated : Tuesday, 26 May 2026