शिवाजी महाराज के वेश में युवक पहुंचा वसई किले, सुरक्षा गार्ड ने प्रवेश से रोका...अब ASI ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

Shivaji Maharaj Dress Entry Denied : मुंबई के वसई किले में शिवाजी महाराज के वेश में पहुंचे एक युवक को सुरक्षाकर्मियों ने प्रवेश से रोक दिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया. युवक श्रद्धांजलि देने और वीडियो शूट करने आया था. घटना का वीडियो वायरल हुआ और लोगों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई. एएसआई ने जांच का आश्वासन दिया है और नियमों के पालन की बात कही है. मामला परंपरा और नियमों के टकराव का बन गया है.

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Shivaji Maharaj Dress Entry Denied : मुंबई के बाहरी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक वसई किले में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब एक युवक छत्रपति शिवाजी महाराज का वेश धारण कर श्रद्धांजलि देने पहुंचा, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उसे अंदर प्रवेश करने से रोक दिया. युवक का इरादा शिवाजी महाराज की स्मृति में वीडियो शूट करने का था, लेकिन किले की सुरक्षा में तैनात गार्डों ने नियमों का हवाला देते हुए शूटिंग की अनुमति नहीं दी.

वीडियो वायरल, सुरक्षा कर्मियों से बहस
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें युवक को गार्डों से बहस करते और उन्हें मराठी में जवाब न देने पर धमकाते हुए देखा जा सकता है. युवक का आरोप था कि किले में प्री-वेडिंग शूट और डांस वीडियो की इजाज़त दी जाती है, लेकिन जब उसने एक ऐतिहासिक प्रतीक का सम्मान करने की कोशिश की, तो उसे रोका गया. उसने इस रोक को छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का अपमान बताया.

स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर गुस्सा
वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में नाराजगी फैल गई. कई यूज़र्स ने इस घटना को असंवेदनशील बताया और सुरक्षा कर्मियों के रवैये की आलोचना की. साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि व्यावसायिक शूटिंग को अनुमति दी जाती है, लेकिन जब कोई ऐतिहासिक श्रद्धा से आता है, तो उसे नियमों का हवाला देकर रोका जाता है.

ASI ने दी कार्रवाई की जानकारी
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वसई किले प्रभारी अधिकारी कैलास शिंदे ने बताया कि मामले की जानकारी उन्हें मिल चुकी है और जांच की जा रही है. उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किले परिसर में शूटिंग के लिए तय नियम हैं, जिनका पालन सभी को करना जरूरी है.

परंपरा बनाम नियम: बड़ा सवाल
यह घटना एक बार फिर उस बहस को जन्म देती है कि ऐतिहासिक स्थलों पर परंपरा, श्रद्धा और नियमों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. जहां एक ओर सांस्कृतिक विरासत का सम्मान जरूरी है, वहीं दूसरी ओर ऐसे स्थलों की सुरक्षा और मर्यादा भी बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है. First Updated : Wednesday, 22 October 2025