उद्घाटन से पहले चर्चा में गंगा एक्सप्रेसवे, Google Maps पर क्यों नहीं दिख रहा रूट
गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले ही एक सवाल चर्चा में है की इतना बड़ा प्रोजेक्ट अभी तक Google Maps पर क्यों नहीं दिख रहा? इसके पीछे की वजह टेक्नोलॉजी और डेटा वेरिफिकेशन से जुड़ी प्रक्रिया है.

नई दिल्ली: भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ्तार लगातार तेज हो रही है और इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी 29 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मल्लावां में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आने वाला है. करीब 36,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट देश के सबसे महत्वाकांक्षी सड़क प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है.
हालांकि, इस भव्य परियोजना को लेकर जहां लोगों में उत्साह है, वहीं एक सवाल भी तेजी से उठ रहा है. इतना बड़ा एक्सप्रेसवे अभी तक Google Maps पर क्यों नहीं दिख रहा? उद्घाटन से पहले ही यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया है और यूजर्स इसके पीछे की वजह जानना चाहते हैं.
Google Maps पर अपडेट में क्यों लगता है समय?
किसी भी नए रोड या एक्सप्रेसवे को Google Maps तुरंत अपने प्लेटफॉर्म पर शामिल नहीं करता. इसके पीछे एक प्रक्रिया होती है, जिसमें कंपनी पहले विभिन्न स्तरों पर डेटा वेरीफाई करती है. इसके लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों से सड़क का सटीक रूट, लोकेशन और अन्य जरूरी जानकारियां जुटाई जाती हैं. जब सारा डेटा एक बार अच्छे से वेरीफाई हो जाता है तब सरकारी एजेंसियों गूगल को सटीक डिजिटल मैप और कोऑर्डिनेट्स दे देती है , तब गूगल अपने मैप्स में नई सड़क जोड़ सकता है.
सैटेलाइट इमेजरी से होती है जांच
गूगल मैप्स नई सड़कें जोड़ने से पहले यह वेरिफाई करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी का भी इस्तेमाल करता है कि कंस्ट्रक्शन पूरी तरह से पूरा हो गया है. जब तक सारी जानकारी साफ और वेरिफाई नहीं हो जाती, तब तक सड़क मैप पर अपडेट नहीं होती है.
एक बार जब यह जानकारी साफ और पूरी तरह से वेरिफाई हो जाती है, तो गूगल सैटेलाइट इमेज लेता है और उन्हें अपडेट करता है. इससे गूगल को यह पहचानने में मदद मिलती है कि कहाँ नई सड़क का कंस्ट्रक्शन पूरा हो गया है और गूगल मैप्स पर उसे अपडेट करने की जरूरत है.
यूजर्स के GPS डेटा की अहम भूमिका
इसके अलावा Google Maps यूजर्स के GPS डेटा पर भी निर्भर करता है. जब बड़ी संख्या में वाहन किसी नए रास्ते पर लगातार चलते हैं, तब सिस्टम को यह संकेत मिलता है कि वह मार्ग सक्रिय हो चुका है. इसके बाद ही उस एक्सप्रेसवे को मैप में जोड़ा जाता है.


