जब सिस्टम से टूटी उम्मीद, इंसाफ मांगने भगवान के दरबार पहुंचे लोग, चारभुजा नाथ मंदिर में सौंपा ज्ञापन

भीलवाड़ा में प्रसूता मौत मामले को लेकर लोगों का आक्रोश अनोखे विरोध में बदल गया. सर्व समाज ने न्याय पदयात्रा निकालकर भगवान चारभुजा नाथ के चरणों में ज्ञापन सौंपा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई.

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भीलवाड़ा: इंसाफ की लड़ाई आमतौर पर अदालत, पुलिस और प्रशासन के दफ्तरों तक पहुंचती है, लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सभी को भावुक कर दिया. महात्मा गांधी चिकित्सालय में हुई पांच महिलाओं की मौत के मामले में जब लोगों को प्रशासन से तत्काल न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर नजर आई, तो उन्होंने अपनी फरियाद सीधे भगवान के दरबार में पहुंचा दी. सर्व समाज के लोगों और युवाओं ने न्याय की मांग को लेकर पदयात्रा निकाली और ऐतिहासिक श्री चारभुजा नाथ मंदिर पहुंचकर भगवान के सामने ज्ञापन अर्पित किया.

कुछ दिन पहले भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय (एमजी हॉस्पिटल) में कथित लापरवाही के चलते तीन प्रसूताओं समेत कुल पांच महिलाओं की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद पूरे शहर में गहरा आक्रोश फैल गया. मृतकों के परिजनों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि अस्पताल में लापरवाही के कारण यह दुखद हादसा हुआ. समय बीतने के बावजूद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती गई. इसी वजह से सर्व समाज के युवाओं ने न्याय की मांग को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया.

न्याय पदयात्रा के जरिए उठाई आवाज

शनिवार सुबह भीमगंज थाने से बड़ी संख्या में लोगों ने 'न्याय पदयात्रा' शुरू की. इस पदयात्रा में विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं ने हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. जब यह पदयात्रा शहर के प्रमुख बाजारों से होकर गुजरी तो लोगों का ध्यान इस आंदोलन की ओर गया. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने दोषी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए न्याय की आवाज बुलंद की. पूरे रास्ते प्रदर्शनकारी महिलाओं की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते रहे.

भगवान चारभुजा नाथ के चरणों में रखी न्याय की अर्जी

इस आंदोलन का सबसे भावुक क्षण तब आया जब पदयात्रा शहर के ऐतिहासिक श्री चारभुजा नाथ बड़े मंदिर पहुंची. यहां प्रदर्शनकारियों ने किसी सरकारी अधिकारी को ज्ञापन देने के बजाय भगवान के सामने अपनी बात रखी. सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने मंदिर परिसर में सामूहिक रूप से प्रार्थना की और भगवान चारभुजा नाथ के चरणों में ज्ञापन अर्पित किया. उन्होंने प्रार्थना की कि सच जल्द सामने आए, दोषियों को उचित सजा मिले और पीड़ित परिवारों को न्याय प्राप्त हो. साथ ही उन्होंने यह भी कामना की कि जिम्मेदार अधिकारियों को सही निर्णय लेने की प्रेरणा मिले.

450 साल पुराना मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र

भीलवाड़ा के मध्य स्थित श्री चारभुजा नाथ बड़ा मंदिर लगभग 450 वर्ष पुराना माना जाता है. यह मंदिर भगवान विष्णु के चारभुजा स्वरूप को समर्पित है और शहर के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि जब सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब भगवान चारभुजा नाथ के दरबार में की गई सच्चे मन की प्रार्थना जरूर सुनी जाती है. यही वजह रही कि आंदोलनकारियों ने न्याय की मांग को भगवान के दरबार तक पहुंचाने का फैसला किया.

शहरवासियों से आंदोलन में जुड़ने की अपील

आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए युवाओं ने पदयात्रा के दौरान लोगों के बीच पर्चे भी वितरित किए. सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलन से जुड़े युवाओं ने शहर के नागरिकों से इस न्याय अभियान में शामिल होने की अपील की. उनका कहना है कि यह केवल पांच महिलाओं के परिवारों का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित हो.

अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

भगवान के दरबार में न्याय की गुहार लगाने की यह अनोखी पहल पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है. अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक न्याय की उनकी मांग जारी रहेगी. वहीं, पीड़ित परिवार भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें इंसाफ मिलेगा. First Updated : Saturday, 18 July 2026