जन्म के समय नारंगी, बड़े होकर हो जाते हैं काले... दुनिया के सबसे दुर्लभ जीव, जिनके बारे मे जानकर हो जाएंगे हैरान

दुनिया की सबसे दुर्लभ प्रजातियों में से एक है ये जीन जो जन्म के समय नारंगी रंग के फर के साथ पैदा होता है, लेकिन जैसे-जैसे यह बड़ा होता है, इसका रंग काला हो जाता है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों प्रकृति का एक बेहद अनोखा और दुर्लभ वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक काले रंग के लंगूर की गोद में नारंगी रंग के दो छोटे बच्चे खेलते हुए नजर आ रहे हैं, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

इस खास वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रिटायर्ड भारतीय वन सेवा अधिकारी सुशांत नंदा ने साझा किया है. उन्होंने इसके साथ इस दुर्लभ प्रजाति से जुड़ी अहम जानकारी भी दी है, जो इसे और भी खास बनाती है.

दुनिया के सबसे दुर्लभ लंगूरों में शामिल

वीडियो में दिखाई देने वाले ये लंगूर ‘कैट बा लंगूर’ प्रजाति के हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त प्राइमेट्स में गिना जाता है. इनकी संख्या जंगलों में अब बेहद सीमित रह गई है. बताया गया है कि इनकी कुल आबादी करीब 70 के आसपास ही बची है, जिससे इनके विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है.

यह प्रजाति मुख्य रूप से वियतनाम के हा लॉन्ग बे के पास स्थित कैट बा द्वीप पर पाई जाती है. यह द्वीप चारों ओर से समुद्र, चट्टानों और गुफाओं से घिरा हुआ है, जहां ये लंगूर आसानी से चढ़ते-उतरते देखे जा सकते हैं.

जन्म के समय नारंगी, बड़े होकर हो जाते हैं काले

इन लंगूरों की सबसे अनोखी खासियत उनका रंग है. इनके बच्चे जन्म के समय चमकीले नारंगी रंग के होते हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं. लेकिन जैसे-जैसे ये बड़े होते हैं, उनका रंग बदलकर काला हो जाता है, जबकि सिर पर हल्के सुनहरे या सफेद बाल बने रहते हैं.

खारा पानी पीकर रहते हैं जिंदा

कैट बा लंगूर की एक और विशेषता इन्हें अन्य जानवरों से अलग बनाती है. ये लंगूर समुद्र का खारा पानी पी सकते हैं, जबकि ज्यादातर जीवों के लिए यह नुकसानदायक होता है. दरअसल, जिस द्वीप पर ये रहते हैं, वहां मीठे पानी की उपलब्धता बहुत कम है, इसलिए ये समुद्र के पानी पर ही निर्भर रहते हैं.

ये लंगूर कभी अपनी पूंछ को पानी में डुबोकर उसे चूसते हैं तो कभी सीधे मुंह से थोड़ा-थोड़ा पानी पीते हैं.

खानपान और स्वभाव

ये लंगूर मुख्य रूप से पत्तियां, फल और फूल खाते हैं और अधिकतर चट्टानी इलाकों में पाए जाते हैं. स्वभाव से ये काफी शर्मीले होते हैं, जिसके कारण इन्हें देख पाना आसान नहीं होता.

शिकार से बढ़ा संकट

पहले इन लंगूरों का बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था. लोग गलत धारणाओं के चलते इन्हें दवाइयों के लिए मारते थे. हालांकि अब सरकार और कई संगठन इनके संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. राहत की बात यह है कि हाल के वर्षों में इनकी संख्या में थोड़ी वृद्धि दर्ज की गई है.

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