साइकिल की घंटी सुनते ही आसमान से उतर आती हैं चीलें, हैरान कर देगी इस शख्स की कहानी
आसमान में अचानक अनगिनत चीलें मंडराने लगती हैं. लेकिन इस खौफनाक से दिखने वाले मंजर के बीचों-बीच साइकिल पर सवार एक बेहद शांत शख्स नजर आता है, जिसे स्थानीय लोग और सोशल मीडिया की दुनिया 'कालीकट का ईगलमैन' कहती है.

नई दिल्ली: केरल के ऐतिहासिक शहर कालीकट का समुद्र तट हर रोज दोपहर के ठीक दो बजे एक बेहद हैरान कर देने वाले नजारे का गवाह बनता है. पहली नजर में इस दृश्य को देखकर कोई भी आम इंसान डर सकता है, क्योंकि आसमान में अचानक अनगिनत चीलें मंडराने लगती हैं. लेकिन इस खौफनाक से दिखने वाले मंजर के बीचों-बीच साइकिल पर सवार एक बेहद शांत शख्स नजर आता है, जिसे स्थानीय लोग और सोशल मीडिया की दुनिया 'कालीकट का ईगलमैन' कहती है. इनका असली नाम अजीजका है, जो पिछले तीन दशकों से इन शिकारी पक्षियों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं.
एक सीटी और आसमान से उतर आती है सेना
अजीजका का यह सिलसिला आज का नहीं, बल्कि पिछले 30 सालों से लगातार चला आ रहा है. रोज दोपहर को जब कोझिकोड बीच पर धूप तेज होती है, तब अजीजका अपनी साइकिल पर चिकन के टुकड़ों से भरा बोरा लादकर वहां पहुंचते हैं. बीच पर आकर वह एक खास तरह की सीटी बजाते हैं. केरल की संस्कृति में इस विशेष सीटी की आवाज को करुणा और ममता का प्रतीक माना जाता है. इस सीटी की आवाज सुनते ही मानो आसमान में चीलों की फौज मुस्तैद हो जाती है. सैकड़ों की तादाद में चीलें नीचे उतरती हैं और अजीजका के हाथों से खाना खाती हैं. भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि कई बार उनके बीच बैठे अजीजका खुद दिखाई देना बंद हो जाते हैं.
डर पर भारी पड़ी बेजुबानों से मोहब्बत
आमतौर पर चील जैसे मांसाहारी और नुकीले पंजों वाले पक्षियों से लोग दूरी बनाकर रखते हैं. इंसानों को देखकर ये पक्षी आक्रामक हो सकते हैं, लेकिन अजीजका के मामले में यह धारणा पूरी तरह गलत साबित होती है. अजीजका को इन पक्षियों से जरा भी डर नहीं लगता और न ही इन चीलों ने आज तक उन्हें कोई नुकसान पहुंचाया है. उनके बीच का यह गहरा भरोसा और तालमेल ही इस कहानी को सबसे अनूठा बनाता है.
इंटरनेट पर जमकर बटोर रहे हैं सुर्खियां
हाल ही में जब अजीजका का यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, तो लोग उनकी इस निस्वार्थ सेवा को देखकर दंग रह गए. सोशल मीडिया यूजर्स उनकी खूब तारीफ कर रहे हैं. एक यूजर ने इस अनोखे दृश्य पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि अजीजका को किसी सरकारी सुरक्षा की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें तो प्रकृति की तरफ से 'XYZ सिक्योरिटी' मिली हुई है, क्योंकि सैकड़ों चीलें हर वक्त उनके इर्द-गिर्द घेरा बनाए रहती हैं. अजीजका की यह कहानी साबित करती है कि अगर पशु-पक्षियों को निस्वार्थ प्रेम और करुणा दी जाए, तो वे भी वफादारी की हर हद पार कर सकते हैं.


