सोना पृथ्वी का वो मूल्यवान खजाना है जो सदियों से इंसान की धरोहर रहा है. कई देशों में सोने का भंडारण किया जाता है, जैसे भारत के पास करीब 840 टन सोने का भंडार है, वहीं अमेरिका के पास 8133 टन है. सोने की खानों से अनवरत सोना निकालने की प्रक्रिया जारी है और हर साल हजारों टन सोना पृथ्वी से निकाला जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी का 99 फीसदी सोना कहीं और ही छिपा हुआ है? ये सोना जमीन की सतह से बहुत नीचे, पृथ्वी के कोर में पाया जाता है. ऐसे में क्या होगा अगर वैज्ञानिक इसे एक दिन निकालने में सफल हो जाएं तो..?
वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी के कोर में इतना सोना है कि अगर इसे किसी तरह निकाल लिया जाए, तो ये पूरे ग्रह को करीब 50 सेंटीमीटर मोटी सोने की परत से ढक सकता है. हालांकि, ये सोना हम तक पहुंचने से बहुत दूर है क्योंकि इंसान अब तक पृथ्वी की कोर तक नहीं पहुंच पाया है.
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, पृथ्वी पर अब तक कुल 1,90,000 टन सोना निकाला जा चुका है. जबकि, खानों में अभी भी करीब 50 हज़ार टन सोना बाकी है. खासकर दक्षिण अफ्रीका के विटवॉटर्सरैंड बेसिन और अमेरिका के नवादा क्षेत्र में सोने की सबसे बड़ी खानों के होने का दावा किया जाता है. ये जगह सोने के खजाने के लिए मशहूर हैं, लेकिन इसके बावजूद पृथ्वी का असली खजाना कहीं और छिपा हुआ है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी का 99 फीसदी सोना इसकी कोर में समाहित है. ये सोना इतना ज्यादा है कि अगर इसे पृथ्वी की सतह पर लाया जाए, तो पूरी पृथ्वी को 50 सेंटीमीटर मोटी सोने की परत से ढक दिया जा सकता है. हालांकि, ये सोना पूरी तरह से पृथ्वी की गहरी कोर में मौजूद है, जो मुख्य रूप से लोहे और निकल से बना हुआ है.
पृथ्वी के कोर तक पहुंचना किसी इंसान के लिए अभी तक एक असंभव कार्य रहा है. वैज्ञानिकों ने कोर तक पहुंचने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन इसकी गहराई और तापमान की वजह से ये कार्य काफी कठिन है. पृथ्वी का कोर इतना गर्म है कि वहां पहुंचने के लिए किसी भी वर्तमान तकनीक की सीमा पार करनी पड़ेगी.
अगर किसी दिन ये सोना पृथ्वी से बाहर लाया जा सके, तो इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? सोने के इस भंडार से दुनिया भर में आर्थिक बदलाव हो सकते हैं. इसका असर सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है और दुनिया की वित्तीय संरचना में भी बदलाव आ सकता है.
इस रहस्यमय सोने के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि ये एक दिन किसी तकनीकी विकास के साथ इंसान के लिए एक नई दिशा खोल सकता है, लेकिन फिलहाल ये एक काल्पनिक सपना ही बना हुआ है. First Updated : Wednesday, 02 April 2025