कान्हा टाइगर रिजर्व में प्लास्टिक की बोतल चबाता दिखा बाघ, वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता

कान्हा टाइगर रिजर्व से सामने आए एक वीडियो ने प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में एक बाघ जंगल के बीच प्लास्टिक की बोतल को मुंह में दबाकर चबाता हुआ दिखाई दे रहा है.

calender

नई दिल्ली: देश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से सामने आए एक वीडियो ने पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में एक बाघ जंगल के बीच प्लास्टिक की बोतल को मुंह में दबाकर चबाता हुआ दिखाई दे रहा है. यह दृश्य केवल एक बाघ का नहीं, बल्कि उन खतरों का संकेत है जो प्लास्टिक प्रदूषण के कारण अब देश के संरक्षित जंगलों तक पहुंच चुके हैं. इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर जंगलों में भी प्लास्टिक पहुंच रही है, तो वन्यजीव कितने सुरक्षित हैं.

यह वीडियो वन्यजीव फोटोग्राफर अनिल वोहरा ने रिकॉर्ड किया, जिसे बाद में डॉ. पीएम ढाकाटे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किया. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बाघ जंगल में पड़ी एक प्लास्टिक की बोतल को उत्सुकता के साथ उठाता है और उसे चबाने लगता है. यह नजारा देखकर लोग हैरान रह गए, क्योंकि यह दर्शाता है कि मानव द्वारा छोड़ा गया कचरा अब वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास तक पहुंच चुका है.

प्लास्टिक प्रदूषण बना वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा

वीडियो साझा करते हुए डॉ. पीएम ढाकाटे ने कहा कि यह केवल जंगल में कूड़ा फेंकने का मामला नहीं है, बल्कि जैव विविधता के लिए गंभीर खतरे का संकेत है. उन्होंने बताया कि प्लास्टिक प्रदूषण धीरे-धीरे वन्यजीवों के जीवन को प्रभावित कर रहा है और इसके दुष्परिणाम लंबे समय तक देखने को मिल सकते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक या अन्य कचरा फेंकने से बचें, क्योंकि इसका सीधा असर वहां रहने वाले जीवों पर पड़ता है.

बड़े और छोटे प्लास्टिक दोनों हैं नुकसानदायक

विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक का हर रूप वन्यजीवों के लिए नुकसानदायक होता है. बड़े प्लास्टिक के टुकड़े या बोतलें जानवरों के शरीर में फंसकर आंतरिक चोट या अवरोध पैदा कर सकती हैं. वहीं, समय के साथ टूटकर बनने वाले माइक्रोप्लास्टिक मिट्टी, पानी और भोजन के जरिए पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में फैल जाते हैं. ये सूक्ष्म कण खाद्य श्रृंखला के माध्यम से छोटे जीवों से बड़े जानवरों तक पहुंचते हैं. इस प्रक्रिया को जैव-आवर्धन (बायोमैग्निफिकेशन) कहा जाता है, जिसके कारण जहरीले तत्व धीरे-धीरे शीर्ष शिकारी जीवों के शरीर में जमा होने लगते हैं और उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं.

पारिस्थितिकी संतुलन में बाघों की अहम भूमिका

विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ केवल एक आकर्षक वन्यजीव नहीं हैं, बल्कि जंगल के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. शीर्ष शिकारी होने के कारण वे अन्य वन्यजीवों की संख्या को नियंत्रित रखते हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बना रहता है. यदि ऐसे जानवर प्लास्टिक प्रदूषण जैसी समस्याओं से प्रभावित होने लगें, तो इसका असर पूरे जंगल के पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ सकता है. इसलिए उनके प्राकृतिक आवास को साफ और सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है.

लोगों ने जताई चिंता, सख्त कदम उठाने की मांग

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने गहरी चिंता व्यक्त की. कई यूजर्स ने इसे बेहद दुखद और चिंताजनक बताया. लोगों का कहना है कि अगर देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले टाइगर रिजर्व में भी प्लास्टिक पहुंच रही है, तो यह गंभीर लापरवाही का संकेत है. कई लोगों ने राष्ट्रीय उद्यानों और वन क्षेत्रों में कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. उनका कहना है कि केवल जंगलों की सुरक्षा या शिकार पर रोक लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्लास्टिक और अन्य मानव अपशिष्ट प्राकृतिक आवास तक न पहुंचें.

संरक्षण के लिए जागरूकता भी है जरूरी

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों और अन्य जंगली जानवरों की सुरक्षा केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है. इसके लिए आम लोगों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. यदि पर्यटक और स्थानीय लोग जंगलों में प्लास्टिक का उपयोग कम करें और कचरा इधर-उधर फेंकने से बचें, तो वन्यजीवों को ऐसे खतरों से काफी हद तक बचाया जा सकता है. कान्हा टाइगर रिजर्व का यह वीडियो एक चेतावनी की तरह सामने आया है, जो बताता है कि प्लास्टिक प्रदूषण अब शहरों और गांवों तक सीमित नहीं रहा. यदि समय रहते इस समस्या पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो इसका असर देश की जैव विविधता और वन्यजीवों के भविष्य पर भी पड़ सकता है. First Updated : Tuesday, 30 June 2026