झारखंड में 1 जुलाई से बदलेगा सरकारी स्कूलों का समय, भीषण गर्मी के बीच अभिभावकों ने जताई चिंता

झारखंड में एक जुलाई से सरकारी स्कूलों के संचालन समय में बदलाव लागू होने जा रहा है. बता दें, 1 जुलाई से विद्यालयों में पहली से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक संचालित की जाएंगी. 

Yashika Jandwani

रांची: झारखंड में एक जुलाई से सरकारी स्कूलों के संचालन समय में बदलाव लागू होने जा रहा है. शिक्षा विभाग के नए आदेश के अनुसार अब राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में पहली से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक संचालित की जाएंगी. इस फैसले के बाद भीषण गर्मी को देखते हुए अभिभावकों और शिक्षकों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है.

सभी कक्षाओं का हुआ एक सामना समय 

वर्तमान में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई सुबह 7 बजे से 11:30 बजे तक होती है, जबकि नौवीं से 12वीं तक की कक्षाएं दोपहर 12 बजे तक संचालित की जाती हैं. वहीं शिक्षक सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. नए आदेश के लागू होने के बाद सभी कक्षाओं का समय एक समान कर दिया जाएगा.

40 डिग्री सेल्सियस पहुंचा तापमान 

अभिभावकों का कहना है कि इन दिनों राज्य के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है. इसी कारण दोपहर के समय तेज धूप और उमस के कारण बच्चों को स्कूल से घर लौटने में दिक्कत हो सकती है. शिक्षकों का भी मानना है कि मौसम की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

1 से 4 जुलाई के बीच चलेगा मासिक धर्म स्वच्छता अभियान 

इसी बीच शिक्षा विभाग ने छात्राओं के स्वास्थ्य और जागरूकता को लेकर भी एक विशेष अभियान शुरू करने की तैयारी की है. झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) के निर्देश पर राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में 1 से 4 जुलाई तक मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.

इस अभियान के तहत विद्यालयों में स्लोगन लेखन, चित्रकला और पेंटिंग प्रतियोगिता, समूह चर्चा, रोल प्ले, नुक्कड़ नाटक तथा "मेरी बात- मेरा संकल्प" जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य किशोरियों में मासिक धर्म से जुड़े भ्रम और सामाजिक मिथकों को दूर करना, स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी उपलब्ध कराना है.

शिक्षा विभाग का कहना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और जागरूकता से जुड़ी सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, जबकि नए स्कूल समय को लेकर सामने आई चिंताओं पर भी स्थिति के अनुसार नजर रखी जाएगी.

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