नई दिल्ली: कॉर्पोरेट जगत में काम के बढ़ते दबाव और 'टॉक्सिक वर्क कल्चर' को लेकर अक्सर बहस होती रहती है. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित ऑफिस नोटिस ने इस बहस को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है. वायरल हो रहे इस नोटिस में लंच ब्रेक को लेकर एक ऐसा नियम बताया गया है. जिसे देखकर इंटरनेट यूजर्स का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है.
क्या है वायरल नोटिस का पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस नोटिस में कर्मचारियों को लंच टाइमिंग का सख्ती से पालन करने को कहा गया है. ऑफिस में लंच ब्रेक के लिए सिर्फ 30 मिनट का समय तय किया गया है. हैरान करने वाली बात यह है कि यदि कोई कर्मचारी इस निर्धारित समय से सिर्फ 1 मिनट भी ज्यादा (यानी 31 मिनट) लेता है, तो उसे सजा के तौर पर शाम को 1 घंटा अतिरिक्त काम करना होगा. मामला यहीं नहीं थमता, नोटिस के अंत में कर्मचारियों के लिए बेहद असंवेदनशील लहजे में एक संदेश लिखा है 'ईट फास्टर' (यानी जल्दी खाओ).
नियमों पर भड़के लोग
जैसे ही यह पोस्ट इंटरनेट पर सामने आई, यह तेजी से चर्चा का विषय बन गई. लोग इस नियम की क्रूरता और अतार्किकता पर सवाल उठा रहे हैं. कई यूजर्स ने इसे कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न करार दिया है. सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को लेकर दो प्रमुख तर्क सामने आ रहे हैं. एक मिनट की देरी के बदले एक पूरा घंटा वसूलना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है. इंसानी जरूरतों को घड़ी की सुइयों से इस कदर नहीं बांधा जा सकता. कुछ यूजर्स ने तंज कसते हुए लिखा कि अगर कंपनियां 1 मिनट की देरी पर 1 घंटे का काम ले सकती हैं, तो कर्मचारियों को भी तय समय के बाद ऑफिस में बिताए हर एक मिनट के बदले 1 घंटे की एक्स्ट्रा सैलरी मांगनी चाहिए.
क्या है इस नोटिस की सच्चाई?
इस पूरे विवाद के बीच इस नोटिस के असली होने पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि वायरल हो रहे इस कागज पर किसी भी कंपनी का नाम, लोगो या किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं. ऐसे में कई लोगों का मानना है कि यह किसी का प्रैंक या ध्यान खींचने का जरिया भी हो सकता है. भले ही यह नोटिस असली हो या फर्जी, लेकिन इसने कॉर्पोरेट कंपनियों में कर्मचारियों के अधिकारों और काम के अमानवीय माहौल पर एक बेहद जरूरी और बड़ी बहस को जन्म दे दिया है. First Updated : Tuesday, 23 June 2026