'मियां-बीबी' मुद्दे में उलझी असम की सियासत, चुनाव से पहले कांग्रेस-बीजेपी ने एक दूसरे पर लगाए आरोप

असम चुनाव के अंतिम चरण में सियासी माहौल गरमा गया है. नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप अब निजी मुद्दों तक पहुंच गए हैं, जिससे चुनावी बहस का केंद्र विकास से हटकर व्यक्तिगत विवादों पर आ गया है.

Shraddha Mishra

असम में चुनावी माहौल अपने चरम पर है और जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, सियासत का तापमान भी बढ़ता जा रहा है. इस बार मुकाबला सिर्फ नीतियों और वादों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निजी आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है, जिसने चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है.

राज्य में सत्ताधारी दल एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहा है, जबकि विपक्ष लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने के बाद वापसी का सपना देख रहा है. दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने प्रमुख चेहरों के साथ मैदान में उतरकर पूरी ताकत झोंक दी है. लेकिन मतदान से ठीक पहले चुनावी मुद्दे अचानक व्यक्तिगत आरोपों की ओर मुड़ गए हैं.

पत्नियों को लेकर बढ़ा विवाद

शुरुआत में हिमंत बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई की पत्नि को लेकर सवाल उठाए थे और उन पर विदेशी संपर्कों के आरोप लगाए थे. यह मुद्दा धीरे-धीरे राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया. अब उसी अंदाज में जवाब देते हुए गौगोई ने भी सत्ताधारी नेता हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर गंभीर आरोप लगा दिए हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक से अधिक देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी संपत्तियां भी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इन संपत्तियों का पूरा विवरण चुनावी हलफनामे में नहीं दिया गया, जो एक गंभीर मामला हो सकता है.

मुख्यमंत्री ने किया पलटवार

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने इन्हें पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया. उनका कहना है कि यह सब राजनीतिक लाभ के लिए फैलाया जा रहा है. उन्होंने साफ किया कि वे और उनकी पत्नी जल्द ही आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे. उनकी पत्नी ने भी बयान जारी कर कहा कि बिना किसी ठोस आधार के इस तरह के आरोप लगाना गलत है और इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.

आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी

इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है. विपक्ष का कहना है कि मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए. वहीं सत्ताधारी दल का आरोप है कि चुनाव से पहले भ्रम फैलाने के लिए झूठी जानकारी पेश की जा रही है. बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने यहां तक कहा कि जारी किए गए दस्तावेजों में कई खामियां हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं. उनके अनुसार, यह सब जल्दबाजी में तैयार किया गया और इसका मकसद सिर्फ राजनीतिक माहौल को प्रभावित करना है.

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