‘टिकट चाहिए तो 5 करोड़ रुपए लगेंगे...’ क्रिकेटर मनोज तिवारी ने छोड़ी TMC, ममता पर लगाए गंभीर आरोप

भारतीय पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट इसलिए नहीं दिया, क्योंकि उन्होंने 5 करोड़ रुपये देने से इनकार कर दिया था।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और बंगाल सरकार में खेल राज्य मंत्री रहे मनोज तिवारी ने मंगलवार (05 मई 2026) को तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी। पश्चिम बंगाल में टीएमसी की करारी हार के ठीक एक दिन बाद तिवारी ने पार्टी पर पैसे लेकर टिकट बांटने का सनसनीखेज आरोप लगाया।

टिकट के लिए मांगे गए 5 करोड़ 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट इसलिए नहीं दिया, क्योंकि उन्होंने 5 करोड़ रुपये देने से इनकार कर दिया था।

उन्होंने दावा किया, “सिर्फ वही लोग टिकट ले पाए जिनके पास भारी-भरकम रकम थी। इस बार कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दिए। मुझसे भी पैसे मांगे गए थे, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब देखिए कि पैसे देने वालों में से कितने लोग चुनाव जीत पाए।”

TMC का अध्याय मेरे लिए खत्म- तिवारी 

आपको बताते चलें कि मनोज तिवारी ने साफ कहा कि तृणमूल कांग्रेस से उनका रिश्ता अब पूरी तरह खत्म हो गया है। उन्होंने कहा, “जहां तक तृणमूल की बात है तो मेरे लिए अब वह अध्याय पूरी तरह से खत्म हो चुका है।” क्रिकेटर ने बताया कि राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं था। 2019 में टीएमसी ने उन्हें लोकसभा का टिकट ऑफर किया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाद में 2021 के विधानसभा चुनाव में वे शिबपुर से लड़े और जीते।

दीदी के कहने पर लड़ा था चुनाव 

मनोज तिवारी ने पुराना किस्सा याद करते हुए कहा, “उस समय मैं आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी पर फोकस था। दीदी चाहती थीं कि मैं लोकसभा लड़ूं, लेकिन मैंने विनम्रता से मना कर दिया।” 

तिवारी ने आगे कहा, “फिर 2021 के चुनाव से पहले दीदी ने मुझे फिर बुलाया और कहा, ‘मनोज मेरे पास तुम्हारे लिए एक संदेश है और अरूप तुम्हें वह संदेश देगा।‘ मुझे शिबपुर से लड़ने को कहा गया। मैंने सोचा कि कुछ बदलाव ला पाऊंगा।” 

राज्य मंत्री का पद सिर्फ लॉलीपॉप था 

मनोज तिवारी ने टीएमसी में आंतरिक लोकतंत्र न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मैं उन बैठकों में गया हूं जहां सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था। मुझे राज्य मंत्री के नाम पर बस एक ‘लॉलीपॉप’ थमा दिया गया था, जिसका कोई मतलब ही नहीं था।” उन्होंने यह भी कहा, “यदि मैं खड़ा होकर कहता, ‘दीदी, मैं आपका ध्यान एक खास समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं’, तो वह बीच में ही रोक देतीं और कहतीं, ‘मेरे पास तुम लोगों के लिए समय नहीं है।” 

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