सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज: कैबिनेट ने 33 से 38 की संख्या को दी मंजूरी, क्या बोले केंद्रीय मंत्री!

लंबित मुकदमों का बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: लंबित मुकदमों का बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आखिरी बार 2019 में जजों की संख्या 31 से 33 की गई थी। यानी छह साल बाद फिर से पद बढ़ाए जा रहे हैं।

कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार का कहना है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट को मजबूत करने और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए लिया गया है। अभी सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं। केस का यह ढेर घटाने के लिए ही जजों की संख्या बढ़ाई जा रही है।

केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान 

आपको बताते चलें कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में एक मुख्य न्यायाधीश और 33 जज हैं। संसद के अगले सत्र में इससे जुड़ा बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद CJI समेत कुल जजों की संख्या 38 हो जाएगी।

1956 से अब तक ऐसे बढ़ी संख्या   

सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या अधिनियम 1956 में शुरुआत में CJI के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। 1960 में यह संख्या 13 हुई, फिर बाद में 17 कर दी गई। 1986 में संशोधन के बाद जजों की संख्या 25 हुई। 2009 में इसे बढ़ाकर 30 किया गया। 2019 में यह 31 से 33 हुई। अब इसे 38 करने का प्रस्ताव है।

क्या कहता है संविधान का नियम 

भारत के संविधान में सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल संख्या तय नहीं है। अनुच्छेद 124(1) के तहत चीफ जस्टिस के अलावा बाकी जजों की संख्या संसद तय करती है। मुकदमों का बोझ बढ़ने पर समय-समय पर इसमें बदलाव होता रहा है।

क्या सिर्फ जज बढ़ाने से हल निकलेगा   

सरकार का मानना है कि जज बढ़ने से पेंडेंसी कम होगी और लोगों को जल्दी न्याय मिलेगा। वहीं कई कानूनी विशेषज्ञों की राय अलग है। उनका कहना है कि सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाना काफी नहीं है। न्याय में देरी की वजह ढांचागत कमियां, प्रक्रिया की जटिलता और तकनीक का कम इस्तेमाल भी है। इन पर भी काम करना होगा। फिलहाल सरकार का यह फैसला न्यायपालिका को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब नजर संसद पर है कि यह बिल कब पास होता है।

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