बंगाल चुनाव से पहले टकराव तेज: 'दफा हो जाओ' बनाम 'चुप रहो' पर चुनाव आयोग और तृणमूल आमने-सामने

बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है. बैठक में हुई तीखी बहस और .चले जाओ. बनाम 'दफा हो जाओ' जैसे बयानों ने विवाद को और भड़का दिया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल और गरमा गया है. चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच एक बैठक के दौरान हुई तीखी नोकझोंक अब बड़ा विवाद बन चुकी है. दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है.

नई दिल्ली में हुई इस बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं.

डेरेक ओ'ब्रायन का आरोप

डेरेक ओ'ब्रायन ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मैं आपको बताना चाहता हूं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने बैठक शुरू होने के सात मिनट के भीतर ही हमसे क्या कहा. 'चले जाओ' - यही बात मुख्य चुनाव आयुक्त ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से कही. इसलिए हम वहां से चले गए. संसद में हम दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी हैं."

नौ पत्रों के जवाब न मिलने पर उठाया मुद्दा

तृणमूल प्रतिनिधिमंडल पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के नौ पत्रों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने पहुंचा था. इन पत्रों का अब तक कोई जवाब नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया.

अधिकारियों के तबादले पर विवाद

ओ'ब्रायन ने कहा,"हमने उनसे कहा कि आप इन अधिकारियों का तबादला कर रहे हैं, तो आप निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कैसे कराएंगे? तब उन्होंने कहा, 'दफा हो जाओ'."

उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को "शर्मनाक" बताते हुए चुनाव आयोग को बैठक की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग जारी करने की चुनौती दी.

चुनाव आयोग का पलटवार

चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, ओ'ब्रायन ने बैठक के दौरान ऊंची आवाज में बात की और मुख्य चुनाव आयुक्त को बोलने नहीं दिया.

सूत्र ने कहा,"मुख्य चुनाव आयुक्त ने श्री डेरेक ओ'ब्रायन से आयोग कक्ष की मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया. चिल्लाना और अभद्र व्यवहार उचित नहीं है."

'अल्टीमेटम' वाला बयान

चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर कहा कि तृणमूल कांग्रेस को साफ संदेश दे दिया गया है कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होंगे.

पोस्ट में कहा गया कि चुनाव भयमुक्त, हिंसामुक्त, धमकीमुक्त और बिना किसी गड़बड़ी के कराए जाएंगे.

तृणमूल का खंडन

सागरिका घोष ने आयोग के बयान को खारिज करते हुए कहा,"चार सदस्यीय @AITCofficial प्रतिनिधिमंडल से इनमें से कुछ भी नहीं कहा गया... मुख्य चुनाव आयुक्त वनीश कुमार ने हमसे सिर्फ दो बातें कहीं. पहली बात: आपका अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता कहां है? और दूसरी सबसे शर्मनाक दो बातें: 'दफा हो जाओ'."

साकेत गोखले का बयान

साकेत गोखले ने भी कहा, "यह झूठ है. मैं व्यक्तिगत रूप से बैठक में उपस्थित था. ऐसी कोई बात नहीं कही गई. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमसे सिर्फ इतना कहा, 'चले जाओ'. हम चुनाव आयोग को बैठक का लिखित रिकॉर्ड जारी करने की चुनौती देते हैं. अन्यथा हम ऐसा करेंगे."

चुनाव की तारीखें

पश्चिम बंगाल में चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी.

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