मेस्सी दौरे के विवाद पर गरमाई सियासत, प्रमोटर सताद्रु दत्ता ने TMC को दी बड़ी चेतावनी

“जीओटी टूर” के प्रमोटर सताद्रु दत्ता ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए 100 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी है.

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Edited By: JBT Desk

पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सियासी माहौल अभी शांत भी नहीं हुआ था कि फुटबॉल स्टार लियोनेल मेस्सी के दौरे से जुड़ा विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है. बता दें, “जीओटी टूर” के प्रमोटर सताद्रु दत्ता ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए 100 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी है. लेकिन क्या है पूरा मामला चलिए जानते है. 

सताद्रु दत्ता का दावा 

प्रमोटर सताद्रु दत्ता ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट शेयर करते हुए ये दावा किया कि सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अव्यवस्था के लिए उन्हें गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि इसके पीछे कई सारे कारण थे. उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना ने उनकी तीन साल की मेहनत पर पानी फेर दिया और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया. इतना ही नहीं सताद्रु दत्ता ने आगे कहा कि वह इस मामले को अदालत तक लेकर जाएंगे और जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय तक भी लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने आगे कहा, “चुनावी हार का मतलब यह नहीं कि किसी को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए. मैं न्याय के लिए अंत तक संघर्ष करूंगा.”

किस कारण बिगड़ा माहौल 

बता दें, इस पूरे विवाद में सताद्रु दत्ता ने पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर भी निशाना साधा. उनका आरोप है कि स्टेडियम में मंत्री और उनके सहयोगियों द्वारा की गई भीड़भाड़ और अनुशासनहीनता के कारण माहौल बिगड़ गया. दत्ता के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान फोटो खिंचवाने की होड़ ने स्थिति को और खराब कर दिया. यहीं वजह रही कि दर्शकों में असंतोष फैल गया और आखिर में तोड़फोड़ की नौबत आ गई. इसी कारण मेस्सी का टूर समय से पहले समाप्त करना पड़ा.

37 दिनों जेल में रहना पड़ा 

घटना के बाद पुलिस ने  सताद्रु दत्ताऔर अन्य लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे, जिसके चलते उन्हें करीब 37 दिनों तक जेल में रहना पड़ा. अब दत्ता का कहना है कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया और वास्तविक जिम्मेदारों को जवाबदेह होना चाहिए. इस विवाद पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज कुमार तिवारी  ने भी प्रतिक्रिया दी है. टीएमसी से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पूर्व खेल मंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि खेल प्रशासन में प्रोफेशनलिज्म की कमी रही है. 

बता दें, हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी को सत्ता से बाहर होना पड़ा, जबकि भाजपा ने बहुमत हासिल कर पहली बार राज्य में सरकार बनाने की स्थिति बनाई है. ऐसे में यह विवाद राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है. अब देखना होगा कि इस मामले पर आगे क्या कार्रवाई होगी.

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