65 सीटें जो तय करेंगी बंगाल में किसकी बनेगी सरकार? SIR ने बंगाल चुनाव का बदल दिया गणित

इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव गणित बदल गयी है. SIR की वजह से वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव आ गया है, जिसने पूरा चुनावी समीकरण बदल दिया है.

Sonee Srivastav

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार 294 सीटों के सामान्य गणित से नहीं, बल्कि करीब 65-70 सीटों से तय होने वाला है. ये वो सीटें है जहां पिछले चुनावों में जीत-हार का फैसला कुछ हजार या कुछ सौ वोटों से होता रहा है. अब इन सीटों पर SIR की वजह से वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव आ गया है, जिसने पूरा चुनावी समीकरण बदल दिया है.

कहां-कहां हुआ है 'खेला'?

इन 65-70 महत्वपूर्ण सीटों में नंदीग्राम, भवानीपुर, उत्तरी 24 परगना का मतुआ बेल्ट, मुर्शिदाबाद और मालदा के अल्पसंख्यक बहुल इलाके शामिल है. 7 अप्रैल तक पूरे बंगाल में 90.83 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं. यानी कुल वोटरों का 11.85% नाम कट गया है.

इनमें सबसे ज्यादा असर 11 जिलों की लगभग 70 सीटों पर पड़ा है. उत्तरी 24 परगना में 13, मुर्शिदाबाद में 10, बांकुड़ा-पुरुलिया में 9, हावड़ा-हुगली में 8 और मेदिनीपुर व बर्धमान में 8-8 सीटें ऐसी हैं जहां मुकाबला पहले से ही बहुत कड़ा था.

कुछ चौंकाने वाले आंकड़े

कुल्टी सीट: बीजेपी ने 679 वोटों से जीती थी, यहां 38,000 नाम हटे.
नंदीग्राम: शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया था, यहां 14,462 नाम हटाए गए.
भवानीपुर: ममता बनर्जी ने 29,000 वोटों से जीत हासिल की थी, यहां 51,000 से ज्यादा नाम कटे.
बोगांव दक्षिण और कल्याणी जैसी सीटों पर भी हटाए गए नाम जीत के अंतर से कई गुना ज्यादा हैं.

दोनों पार्टियों पर असर

SIR का असर किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है. 44 ऐसी सीटें हैं जहां हटाए गए नामों की संख्या 2021 की जीत के अंतर से ज्यादा है. इनमें 24 सीटें टीएमसी के पास और 20 सीटें बीजेपी के पास है. ममता बनर्जी दावा कर रही हैं कि इस बार वे 2021 से भी बड़ी जीत दर्ज करेंगी. वहीं अमित शाह कह रहे हैं कि बीजेपी 170 सीटों तक पहुंच जाएगी. दोनों पार्टियां अब हर बूथ और हर हटाए गए वोटर पर फोकस कर रही है. 

टीएमसी नेता आरोप लगा रहे हैं कि बीजेपी चुनाव आयोग के जरिए वोट चोरी कर रही है. वहीं बीजेपी का कहना है कि SIR से फर्जी और अवैध वोटरों को हटाया गया है, जिससे असली नतीजे सामने आएंगे. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सिर्फ 1% वोट भी इधर-उधर होता है तो कम से कम 15 सीटों का नतीजा पलट सकता है. 2% बदलाव से 20 से ज्यादा सीटें प्रभावित हो सकती हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो