ट्रंप के 10% टैरिफ का असर यूरोप ही नहीं अमेरिका भी झेलेगा, होगा आर्थिक नुकसान

डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड डील को लेकर यूरोप के आठ देशों पर टैरिफ लागू कर तनाव बढ़ा दिया है, जिससे अमेरिका-यूरोप संबंध प्रभावित हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह टैरिफ टेंशन व्यापार, अर्थव्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर डाल सकता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने के अपने प्रयासों में नाटो के ही कुछ सदस्य देशों से टकराव बढ़ा लिया है. ट्रंप ने यूरोप के आठ देशों डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 फीसदी टैरिफ लागू कर दिया है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड डील फाइनल नहीं होती है तो 1 जून 2026 से यह टैरिफ बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा. इस कदम से अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव पैदा हो गया है.

विशेषज्ञों का क्या मानना है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टैरिफ टेंशन और राजनीतिक मतभेद लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसका असर सिर्फ यूरोप पर ही नहीं बल्कि दोनों पक्षों की अर्थव्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा. अमेरिका और यूरोप दुनिया की सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं और हर साल इनके बीच हजारों अरब डॉलर का कारोबार होता है. अमेरिका यूरोप को ऊर्जा, तकनीक और रक्षा से जुड़े आधुनिक उत्पाद सप्लाई करता है, जबकि यूरोप अमेरिका को मशीनरी, ऑटो पार्ट्स, केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स भेजता है.

अगर दोनों तरफ से आयात शुल्क या प्रतिबंध बढ़ते हैं तो यूरोपीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है, जिससे उनके निर्यात और रोजगार पर असर पड़ेगा. इसी तरह अमेरिकी कंपनियों को यूरोप में महंगे उत्पाद बेचने पड़ सकते हैं, जिससे निर्यात घट सकता है.

एनर्जी क्षेत्र में अमेरिका पर यूरोप की निर्भरता

एनर्जी क्षेत्र में भी अमेरिका पर यूरोप की निर्भरता बढ़ी है. रूस पर प्रतिबंध के बाद यूरोप अमेरिकी LNG और क्रूड ऑयल पर निर्भर हो गया है. इससे यूरोप में ऊर्जा की लागत बढ़ी और कीमतें अस्थिर हुईं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव बढ़ता है, तो ऊर्जा सप्लाई को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

तकनीक और रक्षा क्षेत्र में भी अमेरिका का दबदबा है. अमेरिका यूरोप को सेमीकंडक्टर, AI, हाई-टेक चिप्स और डिफेंस सिस्टम सप्लाई करता है. यूरोप लंबे समय से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी भी अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर है.

व्यापार और उद्योग पड़ सकते हैं सुस्त 

अगर यह टैरिफ लंबे समय तक बना रहता है, तो व्यापार और उद्योग सुस्त पड़ सकते हैं, जिससे बैंकिंग सेक्टर और निवेश पर भी दबाव पड़ेगा. विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव सीमित रहे तो नुकसान नियंत्रित रहेगा, लेकिन लंबे समय तक जारी रहा तो यूरोप की GDP पर 0.5-1% तक असर पड़ सकता है.

ट्रंप के इस नए टैरिफ ने यूरोप और अमेरिका के बीच व्यापारिक और राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है. इसके प्रभाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा.

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