CUET 2026 देने वाले लाखों छात्रों का डेटा हुआ लीक, फर्जी वेबसाइटें बेच रहीं पर्सनल जानकारी

इस साल परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों छात्रों का संवेदनशील और निजी डेटा इंटरनेट पर कई वेबसाइटों के जरिए खुलेआम बेचा जा रहा है. इस डेटा लीक के कारण छात्रों को न केवल मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि वे स्पैम कॉल्स, ऑनलाइन फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी के आसान शिकार भी बन सकते हैं.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: भारत में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और स्कूल बोर्ड एग्जाम देने वाले लाखों छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक बेहद परेशान करने वाला और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों छात्रों का संवेदनशील और निजी डेटा इंटरनेट पर कई वेबसाइटों के जरिए खुलेआम बेचा जा रहा है.

कौड़ियों के भाव बिक रहा है डेटा

'studentdataprovider.com', 'studentsdatabases.com' और 'studentdatahub.com' जैसी आधा दर्जन से अधिक वेबसाइट्स इस अवैध कारोबार में सक्रिय हैं. ये पोर्टल्स प्राइवेट यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और एडमिशन कन्सल्टेंट्स को लीड जनरेशन और दाखिले के नाम पर यह डेटा बेच रहे हैं. डेटाबेस के आकार और डेमोग्राफिक फिल्टर्स (जैसे राज्य, शहर, और कैटेगरी) के आधार पर इस पूरे डेटा की कीमत महज 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये के बीच तय की गई है. 'studentdataprovider.com' नामक वेबसाइट पर सीधे तौर पर 'CUET-2026 परीक्षा डेटाबेस' का विज्ञापन चलाया जा रहा है. जिसमें 15 लाख से अधिक उम्मीदवारों की जानकारी होने का दावा है. ग्राहकों को इस डेटा के असली होने का भरोसा दिलाने के लिए वेबसाइट ने 500 छात्रों का डेटा 'फ्री सैंपल' के रूप में लाइव साझा कर दिया है.

लीक डेटा में क्या-क्या है शामिल?

बेचे जा रहे डेटाबेस में उम्मीदवारों के एप्लीकेशन नंबर, उनका नाम, पर्सनल मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि, जेंडर और कोटा कैटेगरीज जैसी बेहद निजी जानकारियां शामिल हैं. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट 2026 की परीक्षा 13 मई से 3 जून के बीच आयोजित की थी और इसके नतीजे 4 जुलाई को ही घोषित किए गए हैं. नतीजों के ठीक बाद इतनी बड़ी मात्रा में संवेदनशील जानकारी का इंटरनेट पर आ जाना पूरी परीक्षा प्रणाली और डेटा सुरक्षा की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

साख और सुरक्षा दोनों दांव पर

इस डेटा लीक के कारण छात्रों को न केवल मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि वे स्पैम कॉल्स, ऑनलाइन फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी के आसान शिकार भी बन सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि एडमिशन के इस पीक सीजन में कन्सल्टेंट्स और निजी संस्थानों को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह के डेटाबेस का सौदा किया जा रहा है. अब देखना यह है कि डीपीडीपी एक्ट के इस दौर में सरकार और जिम्मेदार एजेंसियां इन अवैध वेबसाइटों के खिलाफ क्या सख्त रुख अपनाती हैं.

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