तमिलनाडु में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' तेज, सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बरकरार

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. बहुमत के आंकड़े की जंग के बीच एआईएडीएमके और टीवीके ने अपने विधायकों को रिसॉर्ट में भेज दिया है, जबकि पर्दे के पीछे गठबंधन और समर्थन को लेकर लगातार बातचीत जारी है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक अनिश्चितता के बीच राज्य की राजनीति में हलचल लगातार बढ़ती जा रही है. बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की जद्दोजहद में जुटी पार्टियां अब अपने विधायकों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं, जिसके चलते राज्य में ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ फिर चर्चा में आ गई है.

एआईएडीएमके ने संभावित दल-बदल और खरीद-फरोख्त की आशंकाओं के बीच अपने विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में भेजना शुरू कर दिया है. पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह के राजनीतिक जोखिम से बचना चाहता है और इसी वजह से विधायकों को एकजुट रखने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं.

पुडुचेरी के रिसॉर्ट में शिफ्ट किए गए विधायक

सूत्रों के मुताबिक, एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सीवी शनमुगम ने पुडुचेरी के द शोर त्रिश्वम होटल में 20 से ज्यादा कमरे बुक कराए हैं. एडप्पाडी के पलानीस्वामी के करीबी माने जाने वाले शनमुगम ने गुरुवार तक के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं.

पार्टी के कई विधायक पहले ही पुडुचेरी पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य विधायकों के पहुंचने का सिलसिला जारी है. सरकार गठन से जुड़ी संभावित बातचीत और राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए पार्टी अपने विधायकों को साथ बनाए रखना चाहती है.

बहुमत के समीकरणों ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी

राज्य में सरकार गठन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है. ऐसे में राजनीतिक दल लगातार समर्थन जुटाने में लगे हैं. सूत्रों का कहना है कि अगर राजनीतिक हलचल और तेज हुई तो रिसॉर्ट में अतिरिक्त कमरों की भी व्यवस्था की जा सकती है.

इसी बीच एआईएडीएमके के भीतर आंतरिक मतभेदों की खबरों ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है. चर्चा है कि पार्टी के कुछ विधायक विजय की तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) को समर्थन देने के पक्ष में हैं.

सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी TVK

तमिलगा वेट्री कज़गम 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे अभी भी 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना बाकी है. इसी कारण पार्टी लगातार अन्य दलों और विधायकों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है.

राजनीतिक घटनाक्रम में उस समय नया मोड़ आया जब डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गुप्त बातचीत की खबरें सामने आईं. तमिलनाडु की राजनीति में दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, इसलिए यह चर्चा काफी अहम मानी जा रही है.

डीएमके-एआईएडीएमके बातचीत पर बढ़ी चर्चा

एआईएडीएमके सूत्रों ने डीएमके के साथ बातचीत होने की पुष्टि की है, हालांकि संभावित गठबंधन को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है. वर्तमान सीट गणित के अनुसार डीएमके के पास 59 सीटें हैं, जबकि एआईएडीएमके के खाते में 47 सीटें आई हैं. ऐसे में किसी भी गठबंधन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

राज्यपाल से मिले विजय

टीवीके प्रमुख विजय ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया. हालांकि राज्यपाल ने उनसे 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण देने को कहा है.

सूत्रों के अनुसार, विजय को फिलहाल 112 विधायकों का समर्थन हासिल है, जिसमें कांग्रेस के पांच विधायक भी शामिल हैं. इसके बावजूद पार्टी बहुमत से कुछ सीटें पीछे चल रही है.

छोटी पार्टियों की भूमिका अहम

कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद टीवीके ने एआईएडीएमके से बातचीत रोक दी है, लेकिन अन्य दलों के साथ संपर्क बनाए रखा है. वहीं डीएमके की सहयोगी वीसीके जैसी छोटी पार्टियां भी सत्ता के समीकरण में अहम भूमिका निभा सकती हैं.

हालांकि वीसीके द्वारा गुरुवार को प्रस्तावित बैठक रद्द किए जाने से राजनीतिक स्थिति और अधिक उलझ गई है. दूसरी तरफ डीएमके की सहयोगी वामपंथी पार्टियां शुक्रवार को यह फैसला लेंगी कि वे सरकार गठन के लिए टीवीके का समर्थन करेंगी या नहीं.

TVK ने भी अपनाई रिसॉर्ट रणनीति

राजनीतिक खींचतान के बीच टीवीके ने भी अपने विधायकों को मामल्लापुरम के रिसॉर्ट्स में ठहराया है. इससे साफ है कि सरकार गठन को लेकर सभी दल पूरी सतर्कता बरत रहे हैं और किसी भी तरह की टूट-फूट से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

तमिलनाडु में जारी इस सियासी उठापटक के बीच सरकार गठन की तस्वीर अब भी साफ नहीं हो सकी है. पर्दे के पीछे लगातार बातचीत जारी है और सभी दल बहुमत का आंकड़ा जुटाने की कोशिशों में लगे हुए हैं.

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